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रविवार, 10 जून, 2007 को 21:47 GMT तक के समाचार

सार्कोज़ी की पार्टी भारी बहुमत की ओर

फ़्रांस में संसदीय चुनाव की मतगणना के शुरुआती रुझानों के मुताबिक राष्ट्रपति निकोला सार्कोज़ी की मध्य दक्षिणपंथी पार्टी भारी जीत की ओर बढ़ रही है.

ऐसा आकलन है कि सार्कोज़ी की पार्टी और उनके सहयोगी दलों ने जिन सीटों पर चुनाव लड़े थे उनमें से 80 फ़ीसदी पर उनकी जीत हो सकती है.

सार्कोज़ी को अपने महत्वाकांक्षी सामाजिक-आर्थिक सुधारों को आगे बढ़ाने के लिए संसद में व्यापक समर्थन की ज़रूरत है.

उनकी एक योजना काम घंटे बढ़ाने का है जिससे फ़्रांसीसियों को ज़्यादा पैसे भी मिलेंगे.

मौजूदा प्रधानमंत्री फ़्रैंकोई फ़िल्लन ने कहा है कि चुनाव से यह साबित हो गया है कि लोग पिछले गलतियों को दोहराना नहीं चाहते.

हालाँकि विपक्षी सोशलिस्ट पार्टी इस बात को उठा रही है कि सार्कोज़ी और उनके समर्थकों को ज़रुरत से ज़्यादा ताकत मिल जाएगी.

दूसरे और निर्णायक चरण का मतदान अगले रविवार को होगा.

सार्कोज़ी की अपील

सार्कोज़ी ने देश के साढ़े चार करोड़ मतदाताओं से उनकी मध्य दक्षिणपंथी पार्टी यूएमपी को भारी बहुमत से जिताने की अपील की थी ताकि राष्ट्रपति चुनाव के दौरान किए गए आर्थिक सुधारों के वादे को वो प्रभावी तरीके से पूरा कर सकें.

माना जा रहा है कि सार्कोज़ी की पार्टी यूएमपी नेशनल असेंबली के निचले सदन में अपने बहुमत को और मजबूत करेगी जबकि राष्ट्रपति चुनाव में सार्कोज़ी से परास्त हुई सेगोलीन रोयाल की सोशलिस्ट पार्टी को अपनी सीटें गँवानी पड़ेंगी.

मतदान प्रक्रिया

दूसरे दौर के मतदान की प्रक्रिया लगभग एक सप्ताह में पूरी होगी.

शनिवार को शुरू हुई मतदान की प्रक्रिया में सबसे पहले विदेशों में बसे फ़्रांस के लोगों ने अपने मताधिकार का उपयोग किया.

फ़्रांस में मतदान रविवार सुबह स्थानीय समयानुसार आठ बजे शुरू होगा और रात्रि आठ बजे तक वोट डाले गए.

किसी भी उम्मीदवार के विजयी होने के लिए ज़रूरी है कि संसदीय क्षेत्र में कम से कम 25 फ़ीसदी मतदान हो और उम्मीदवार को 50 प्रतिशत के अधिक वोट हासिल हों.

ऐसा नहीं होने की स्थिति में संसदीय क्षेत्र में 10 जून को दोबारा वोट डाले जाएँगे.

सुधार कार्यक्रम

राष्ट्रपति सार्कोज़ी का कहना है कि वह अपने राजनीतिक सुधार कार्यक्रमों का पहला चरण शुरू करने के लिए जुलाई में संसद का विशेष सत्र बुलाएँगे.

इन सुधारों के तहत प्रवासी नियमों को और कड़ा करना और विश्वविद्यालयों को अधिक स्वतंत्रता देना शामिल है.

इसके अलावा नया वित्त विधेयक भी पेश किया जाना है, जिसके तहत ओवरटाइम के ज़रिए होने वाली आमदनी करमुक्त होगी, जबकि विरासत में मिली राशि या संपत्ति पर कर समाप्त हो जाएगा.