रविवार, 03 जून, 2007 को 10:21 GMT तक के समाचार
पोलैंड के टेलीविज़न की रिपोर्ट के अनुसार जैन ज़ेबस्की 19 साल कोमा में रहने के बाद जब होश में आए तो उनके लिए दुनिया एकदम बदल गई थी.
पोलैंड में कम्युनिस्ट पार्टी का शासन ख़त्म हो चुका था और सामान भी राशन प्रणाली से नहीं मिल रहा था.
रेलवे में काम करने वाले 65 वर्षीय जैन ज़ेबस्की वर्ष 1988 में ट्रेन दुर्घटना के बाद कोमा में चले गए थे.
उन्होंने सामचार चैनल टीवीएन-24 को बताया, '' अब सबके हाथों में मोबाइल है और दुकानें भी सामानों से भरी हुई हैं. यह सब देखकर मेरा तो सिर चक्कर खा रहा है.''
ज़ेबस्की अपने फिर से स्वस्थ होने का श्रेय अपनी पत्नी गेर्टरुडा को देते हैं, जिन्होंने इस दौरान उनकी देखभाल की.
दुर्घटना के बाद डॉक्टरों ने बताया था के वे दो से तीन साल ही जीवित रहेंगे.
ज़ेबस्की ने ठीक होने के बाद टीवीएन-24 को बताया, ''मैं ये कभी नहीं भूल सकता कि गेर्टरुडा ने मेरी ज़िंदगी बचाई है.''
गेर्टरुडा अपने पति को हमेशा बिस्तर पर नहीं पड़े रहने देती थी और हर घंटे उनकी स्थिति बदल देती थीं.
गेर्टरुडा ने पोलसैट टेलीविज़न को बताया, '' जो भी मिलने आता था यही पूछता था कि वे कब मरेंगे. मैं बहुत रोती थी और प्रार्थना करती थी. भगवान का शुक्र है वो बच गए.''
जब ज़ेबस्की दुर्घटना के शिकार हुए थे तब पोलैंड में अंतिम कम्युनिस्ट नेता वॉयचेक यारोज़ेलस्की शासन कर रहे थे.
ज़ेबस्की ने बताया, '' जब मैं कोमा में गया था तब दुकानों में चाय और विनेगर ही मिलते थे. माँस राशन से मिलता था और पेट्रोल के लिए तो लंबी-लंबी कतारे देखी जाती थीं.''
उसके अगले साल हुए चुनाव में यहाँ से कम्युनिस्टों का शासन ख़त्म हो गया.
वर्ष 1999 में पोलैंड नैटो का सदस्य बना और 2004 में यूरोपीय संघ में शामिल हो गया.
ज़ेबस्की कहते हैं, "होश में आने के बाद जो चीज़ मुझे सबसे ज़्यादा रोमांचित करती है वह यह लोगों का चलते हुए हर वक़्त मोबाइल पर बाते करते रहना.''
वे कहते हैं, '' इन बदलावों से मुझे कोई शिकायत नहीं है.''