रविवार, 03 जून, 2007 को 19:25 GMT तक के समाचार
लेबनान में एक अन्य फ़लस्तीनी शरणार्थी शिविर के पास इस्लामिक चरमपंथियों और लेबनानी सेना के बीच संघर्ष शुरू हो गया है. आइन अल-हिलवे शरणार्थी शिविर देश के दक्षिण में स्थित है.
माना जा रहा है कि संघर्ष उस समय शुरू हुआ जब जुंद अल शाम गुट के चरमपंथियों ने सिडोन शहर के निकट एक सैनिक चौकी पर हमला किया.
दो सप्ताह पहले देश के उत्तर में स्थित शरणार्थी शिविर नाहर-अल-बारेद में भी जैश-ए-इस्लाम और लेबनानी सैनिकों के साथ इसी तरह का संघर्ष शुरू हुआ था.
पिछले कुछ दिनों में यह संघर्ष और तेज़ हुआ है. अभी यह स्पष्ट नहीं हो पाया है कि दोनों कैंपों का संघर्ष आपस में जुड़ा हुआ है. मानवाधिकार संगठन एमनेस्टी इंटरनेशनल ने नाहर-अल-बारेद में रह रहे हज़ारों फ़लस्तीनी शरणार्थियों को लेकर चिंता जताई है.
एमनेस्टी इंटरनेशनल के एक प्रवक्ता नील सैमंड ने बताया कि इन शरणार्थी शिविरों में कई बुजुर्ग, विकलांग और बच्चे ऐसे हैं जो संघर्ष शुरू होने के बाद कैंप छोड़कर नहीं जा पा रहे हैं.
संघर्ष
प्रत्यक्षदर्शियों का कहना है कि आइन-अल-हिलवे के पास चल रहे संघर्ष के दौरान लेबनानी सैनिक ग्रेनेड से हमला करके चरमपंथियों का जवाब दे रहे हैं.
बीबीसी संवाददाता किम घटास का कहना है कि जुंद अल-शाम के चरमपंथी उन्हीं चरमपंथियों की तरह हैं जो नाहर-अल-बारेद में लेबनानी सैनिकों के साथ संघर्ष कर रहे हैं.
नाहर-अल-बारेद में चल रहे संघर्ष के दौरान 100 से ज़्यादा नागरिक, सैनिक और चरमपंथियों के मारे जाने की ख़बर है. लेबनानी सेना का कहना है कि फ़तह-अल-इस्लाम के चरमपंथियों को फ़लस्तीनी शिविर के पास से खदेड़ दिया गया है.
प्रधानमंत्री फ़ुआद सिन्यूरा ने इस गुट को "आतंकवादी गैंग" की संज्ञा दी और कहा कि इन गुटों के साथ किसी तरह की बातचीत नहीं होगी.
लेकिन फ़तह अल इस्लमाम के एक प्रवक्ता अबू सालिम ताहा का कहना है कि वे ख़ून के आख़िरी क़तरे तक संघर्ष करेंगे और हथियार नहीं डालेंगे.