बुधवार, 23 मई, 2007 को 10:06 GMT तक के समाचार
बच्चों के कल्याण के लिए काम करने वाली संयुक्त राष्ट्र संस्था यूनीसेफ़ ने कहा है कि इराक़ में हिंसा जारी रहने से बहुत से बच्चे मानवीय त्रासदी में फँसे नज़र आ रहे हैं और जिन चालीस लाख लोगों को अपने घर छोड़ने पड़े हैं उनमें लगभग आधे बच्चे ही हैं.
यूनीसेफ़ का कहना है कि बच्चों के कल्याण के लिए जितनी अंतरराष्ट्रीय सहायता इराक़ में पहुँचाई जा रही है, बच्चों की ज़रूरतें उससे कहीं ज़्यादा है और अगले छह महीनों में लगभग चार करोड़ बीस लाख डॉलर की रक़म की ज़रूरत होगी.
संस्था का कहना है, "हिंसा की वजह से बहुत सी महिलाएँ विधवा बन रही हैं और उनके बच्चे भी अनाथ हो रहे हैं, उनमें से बहुत से ज़िंदा रहने के लिए कड़ी जद्दोजहद करने के लिए मजबूर होते हैं."
व्यापक प्रभाव
यूनीसेफ़ की मध्य पूर्व में मौजूद एक अधिकारी क्लेयर हजाज ने बीबीसी के साथ बातचीत में कहा कि इराक़ में बच्चों के लिए त्रासदी का माहौल पहले ही बन चुका है, "हम हालात के और ख़राब होने का इंतज़ार नहीं कर सकते, या यह चेतावनी भी नहीं दे रहे हैं कि यह और बिगड़ सकती है, बल्कि स्थिति पहले ही बहुत ख़राब हो चुकी है."
क्लेयर हजाज का कहना था, "उन्हें बुनियादी मानवीय सहायता की ज़रूरत है और जो लोग विस्थापित परिवारों, ख़ासकर इराक़ में इस तरह की मदद के कामों में लगे हैं, उन्हें भी सहायता की ज़रूरत है."
क्लेयर हजाज का कहना था कि यूनीसेफ़ सहायता राशि का इस्तेमाल इराक़ में प्रभावित परिवारों तक दवाइयों, भोजन, स्वच्छ जल पहुँचाने और बच्चों को स्कूली शिक्षा दिलाने के लिए करना चाहता है, साथ ही युनीसेफ़ सीरिया और जॉर्डन में इराक़ी बच्चों के लिए स्वास्थ्य सेवाओं को और बेहतर बनाने के लिए वहाँ की सरकारों की भी मदद करना चाहती है.
एजेंसी का कहना है कि इराक़ी बच्चों तक पहुँचने वाली सहायता बहुत महत्वपूर्ण है और उसका उनके जीवन पर बहुत ही सकारात्मक असर पड़ रहा है.
आपातकालीन अभियानों के लिए यूनीसेफ़ के प्रमुख डेनियल टूली का कहना था, "इराक़ में रोज़मर्रा के हमारे अभियानों से हम समझ रहे हैं कि बच्चों तक सहायता पहुँच रही है और इसका व्यापक असर भी देखने में आ रहा है, यहाँ तक कि बहुत ही असुरक्षित क्षेत्रों में भी बच्चों के हालात में इस सहायता से बदलाव हो रहा है."
डेनयिल टूली ने हाल ही का एक उदाहरण देते हुए कहा कि बच्चों को रोग प्रतिरोधी दवाइयाँ देने का एक कार्यक्रम चलाया गया जिसमें लगभग 36 लाख बच्चों को फ़ायदा हुआ लेकिन डेनियल ने आगाह किया कि गर्मी के मौसम में हैजा एक बड़ी समस्या हो सकती है.
यूनीसेफ़ के अनुसार पीने के साफ़ पानी और स्वास्थ्य की समुचित देखभाल की व्यवस्था का अभाव होने से हैजा फैलने का ख़तरा बहुत बढ़ गया है.