मंगलवार, 22 मई, 2007 को 09:54 GMT तक के समाचार
लेबनान के उत्तरी हिस्से में नाहर अल बारेद स्थित फ़लस्तीनी शरणार्थी शिविर के आसपास सरकारी सैनिकों और इस्लामी चरमपंथियों के बीच मंगलवार को तीसरे दिन भी लड़ाई हो रही है.
यह इलाक़ा लेबनान के एक प्रमुख उत्तरी शहर त्रिपोली के पास है. मानवाधिकार संगठनों ने युद्धविराम का आहवान किया है ताकि हताहतों को शिविर के बाहर निकाला जा सके और ज़रूरी चीज़े शिविर में पहुँचाई जा सकें.
गत रविवार को भड़की इस लड़ाई में पचास से ज़्यादा लोगों की मौत हो चुकी है. बीती रात राजधानी बेरूत में एक बम विस्फोट हुआ जिसमें छह लोग ज़ख़्मी हो गए.
लेबनानी सेना ने फ़लस्तीनियों के शिविर की घेराबंदी कर ली है और फ़तह अल इस्लाम संगठन के चरमपंथी लड़ाके वहाँ मोर्चा संभाले हुए हैं और उनका कहना है कि वे आख़िरी दम तक लड़ाई के लिए तैयार हैं.
फ़तह अल इस्लाम संगठन के एक प्रवक्ता ने समाचार एजेंसी एएफ़पी से कहा, "हमारे लड़ाके ख़ून की आख़िरी बूंद तक लड़ने के लिए तैयार हैं."
उस शिविर में हज़ारों आम लोग भी घिरे हुए हैं और इस तनावपूर्ण स्थिति में उनकी सुरक्षा की चिंता बढ़ रही है. फ़लस्तीनी शरणार्थी शिविर में लगभग 31 हज़ार लोग मौजूद हैं.
हालत ख़राब है
बीबीसी संवाददाता जिम मुईर नाहर अल बारेद शिविर के पास मौजूद हैं और उनका कहना है कि वह इलाक़ा काफ़ी घनी आबादी वाला है.
बीती रात दोनों तरफ़ से रुक-रुककर गोलीबारी होती रही और सेना तोपों और टैंकों से गोलीबारी कर रही है. सेना ने शिविर की घेराबंदी कर रखी है.
मंगलवार को सुबह दोनों तरफ़ से गोलीबारी काफ़ी तेज़ हो गई जिसमें चोटे हथियारों के साथ-साथ मशीन गनों का भी इस्तेमाल किया गया.
अभी यह स्पष्ट नहीं कि क्या कोई पक्ष बढ़त बनाने की कोशिश कर रहा है. लेबनानी सेना ने कहा है कि अगर चरमपंथी गोलीबारी रोक दें तो वह भी गोलीबारी रोकने के लिए तैयार है.
संदेह है कि फ़तह इस्लाम संगठन का संबंध अल क़ायदा से है. उसने धमकी दी है कि अगर शिविर पर गोलाबारी नहीं रोकी जाती है तो वह भी अपनी लड़ाई बढ़ा देंगे.
बीबीसी संवाददाता का कहना है कि इस स्थिति में फ़तह इस्लाम के संभवतः कुछ सैकड़ा चरमपंथी शामिल हैं लेकिन वे मज़बूती से मोर्चा संभाले हुए नज़र आते हैं और उनके पास हथियार भी भारी मात्रा में लगते हैं.
बीच-बीच में ऐसी ख़बरें भी आ रही हैं कि कोई समझौता कराने की कोशिश भी हो रही हैं ताकि घायलों को शिविर से निकालकर इलाज के लिए ले जाया जा सके. डॉक्टरों का कहना है कि बहुत से घायल सड़कों पर पड़े हैं.
शिविर में बिजली गुल हो गई है और पानी की भी किल्लत है.
अभी तक सिर्फ़ कुछ ही घायलों को शिविर से निकाला जा सका है और समझा जाता है कि बहुत से लोग अब भी गंभीर रूप से घायल हैं और शिविर के अंदर उनकी हालत बिगड़ती जा रही है.