रविवार, 20 मई, 2007 को 13:31 GMT तक के समाचार
लेबनानी सेना और फ़लस्तीनी शरणार्थी शिविर के इस्लामी बंदूकधारियों के बीच त्रिपोली के पास संघर्ष हुआ है जिसमें कम से कम 40 लोग मारे गए हैं.
ख़बरों के अनुसार संघर्ष में फ़तह इस्लाम गुट के 15 लड़ाके और 23 लेबनानी सैनिकों की मौत हो गई है. इनके अलावा दो आम नागरिक भी इस संघर्ष की चपेट में आ गए.
इसे सन् 1990 के गृह युद्ध के बाद से लेबनान का सबसे बड़ा आंतरिक संघर्ष माना जा रहा है.
रविवार को बेरूत में एक धमाका भी हुआ है. ख़बर हैं कि इस धमाके में एक महिला की मौत हो गई और 10 अन्य घायल हो गए थे. हालांकि इस धमाके की वजह का अभी पता नहीं चला है.
ख़बर है कि संघर्ष की शुरुआत तब हुई जब लेबनान के सैनिकों ने एक बैंक में डकैती के सिलसिले में एक घर पर छापा मारा.
इसके बाद कुछ लोगों ने नाहर अल-बारेद शरणार्थी शिविर के पास सैन्य कमानों पर हमला करना शुरु कर दिया.
माना जा रहा है कि चरमपंथी संगठन का संबंध कथित तौर पर अल क़ायदा से है.
हिंसा के बाद सीरिया ने अस्थाई तौर पर उत्तरी लेबनान के साथ अपनी सीमा बंद कर दी.
'बचाव'
फ़तह इस्लाम के प्रवक्ता अबू सलीम ने अल जज़ीरा को बताया कि वे लोग सिर्फ़ अपनी रक्षा कर रहे थे.
उन्होंने कहा," बात तब शुरू हुई जब त्रिपोली में हमारे साथियों को बार-बार गिरफ़्तार किया गया. हमने हमेशा लेबनान में सुन्नियों का बचाव किया है. इस बार झड़प काफ़ी बड़ी थी और हम उनके बचाव के लिए गए थे."
लेबनान में तीन लाख पचास हज़ार से ज़्यादा फ़लस्तीनी शरणार्थी रहते हैं. जब 1948 में इसराइल का गठन हुआ था तो ये लोग अपने घरों से भाग आए थे.
फ़रवरी में राजधानी बेरुत के ईसाई इलाक़े में बम धमाके हुए थे और आरोप लगाया था कि इसमें फ़तह इस्लामी चरमपंथियों का हाथ है.
उसके बाद से ही नाहर अल बारेद शिविर चर्चा में है. इस शिविर में करीब 30 हज़ार विस्थापित रहते हैं. 38 साल पुराने एक समझौते के तहत सेना इसमें प्रवेश नहीं कर सकती.