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सोमवार, 14 मई, 2007 को 14:00 GMT तक के समाचार

ब्रिटेन में एक बैल को बचाने की मुहिम

ब्रिटेन में टीबी से पीड़ित शंभू नाम के एक बैल को सरकारी नियमों के तहत मारे जाने को लेकर विवाद चल रहा है.

स्कंद वेल मंदिर से जुड़े लोग शंभू को मारे जाने का विरोध कर रहे हैं. इस मंदिर से हिंदुओं समेत कई धर्मों के लोग जुड़े हुए हैं.

ब्रिटेन में वेल्स एसेंबली के नियमों के तहत छह साल के शंभू को 21 मई को मारा जाना है.

स्कंद वेल मंदिर और हिंदू फ़ोरम ऑफ़ ब्रिटेन के अधिकारियों का कहना है कि गाय और बैल को मारना उनकी धार्मिक मान्यताओं के ख़िलाफ़ है.

लेकिन वेल्स सरकार ने कहा है कि मानवों और जानवरों के स्वास्थ्य की रक्षा करने के लिए संक्रमित पशुओं को मारना होगा.

परीक्षण के दौरान पाया गया था कि शंभू को टीबी है और उसके बाद से उसे अलग से रखा गया है.

इस बैल को बचाने के लिए छह हज़ार से ज़्यादा लोगों ने ऑनलाइन याचिका पर हस्ताक्षर किए हैं. लेकिन अंतिम फ़ैसला वेल्स की सरकार को लेना है.

बचाने की कोशिशें

स्कंद वेल मंदिर के भिक्षु एक वेब कैमरा लगाने की भी कोशिश कर रहे हैं ताकि लोग शंभू पर नज़र रख सकें.

पास के इलाक़े में रहने वाले किसान डेविस का इस बारे में कहना है कि शंभू को मारने का फ़ैसला मुश्किल काम है. पर साथ ही उनका मानना है, "अगर आपका पशु संक्रमित है, तो इससे और पशु भी संक्रमित हो सकते हैं. सरकार के नियमों के तहत जानवर को मारा जाना ही विकल्प है."

स्कंद वेल मंदिर से जुड़े ब्रदर माइकल का कहना है कि इस मामले ने अंतरराष्ट्रीय रंग ले लिया है.

उन्होंने बताया, "मुझे कुछ देर पहले ही ऑस्ट्रेलिया से फ़ोन आया था. सीएनएन, फ़ॉक्स न्यूज़, रूसी मीडिया हमसे बात कर चुका है. ये अहम मु्द्दा है."

ब्रदर माइकल ने कहा है कि वेल्स की सरकार चाहे तो शंभू को बचाने के लिए नियमों को लचीला कर सकती है.

ब्रदर माइकल ने कहा कि वे उम्मीद करते हैं कि ऐसे किसी विकल्प पर पहुँचा जा सकता है जिसमें शंभू को मारा न जाए.

शुक्रवार को वेल्श एसेंबली सरकार के वरिष्ठ पशुपालन अधिकारी शंभू को देखने आए थे और कहा था कि इस मुद्दे से संवदेनशीलता से निपटा जाएगा.

पिछले वर्ष वेल्स में 5220 पशुओं को मारा गया था क्योंकि वे टीबी से पीड़ित थे.