बुधवार, 09 मई, 2007 को 13:56 GMT तक के समाचार
अरबी टेलीविज़न चैनल अल जज़ीरा को एक वीडियो टेप मिला है जिसे फ़लस्तीनी क्षेत्र ग़ज़ा में बीबीसी संवाददाता एलन जॉन्सटन का अपहरण करने वालों की तरफ़ से आया बताया गया है.
इस वीडियो टेप में एलन जॉन्सटन की कोई तस्वीर तो नहीं दिखाई गई है लेकिन उनका बीबीसी का पहचान-पत्र दिखाया गया है.
इस वीडियो टेप में माँग की गई है कि ब्रिटेन की जेलों में बंद सभी मुस्लिम क़ैदियों को रिहा कर दिया जाए. टेप में क़ुरआन का पाठ भी दिखाया गया है.
44 वर्षीय बीबीसी संवाददाता एलन जॉन्सटन 12 मार्च को फ़लस्तीनी क्षेत्र ग़ज़ा में उस समय लापता हो गए थे जब वह दफ़्तर से अपने घर की तरफ़ लौट रहे थे. बताया जाता है कि कुछ बंदूकधारियों ने उनका अपहरण कर लिया था.
यह वीडियो टेप ग़ज़ा में अल जज़ीरा को पहुँचाया गया और इसके बनाने वालों ने दावा किया है कि वे जैश-ए-इस्लाम यानी इस्लाम की सेना नामक संगठन से संबंधित हैं.
बीबीसी के डिप्टी डायरेक्टर जनरल मार्क बायफ़र्ड ने कहा है कि बीबीसी एलन जॉन्सटन की सुरक्षा के लिए बहुत चिंतित है.
उन्होंने कहा, "एलन को अगवा किए जाने के 59 दिनों बाद हमारी सबसे बड़ी चिंता उनकी सलामती और उनके परिवार के लिए है. हम और एलन का परिवार बस यही चाहते हैं कि उन्हें सुरक्षित लौटा दिया जाए."
मार्क बायफ़र्ड ने कहा, "ज़ाहिर है कि हम ऐसे किसी भी संकेत का स्वागत करते हैं जिससे यह पता चले कि एलन जीवित हैं. हमें बहुत ज़्यादा उम्मीद है कि आज के इस वीडियो समाचार के बाद ये संकेत मिले हैं कि एलन जल्दी ही सुरक्षित वापस लौट सकते हैं."
विशेष माँग
वीडियो में एक ख़ास माँग की गई है कि ब्रिटेन की जेल में बंद एक फ़लस्तीनी मूल के इस्लामी विद्वान अबू क़तादा को रिहा कर दिया जाए. ब्रितानी पुलिस को अबू क़तादा के बारे में शक है कि उनका संबंध अल क़ायदा से है और उन्हें राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए ख़तरा मानते हुए जेल में बंद किया गया है.
एलन जॉन्सटन के अपहर्ताओं ने इस वीडियो से पहले तक अपनी कोई माँग नहीं रखी थी और न ही मीडिया से किसी तरह का संपर्क किया था.
अप्रैल महीने में तौहीद और जेहाद ब्रिगेट नामक एक बेनाम संगठन ने एलन जॉन्सटन को मार देने का दावा किया था लेकिन उन दावों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं की जा सकी थी.
फ़लस्तीनी सरकार का कहना है कि उसे ऐसी सूचना मिली है कि एलन जॉन्सटन जीवित हैं और उनकी रिहाई के लिए प्रयास किए जा रहे हैं.
बीबीसी के विश्व मामलों के संवाददाता माइक वुलरिज का कहना है कि इस्लाम की सेना नामक संगठन के बारे में ज़्यादा कुछ नहीं सुना गया है लेकिन यह तो साफ़ है कि यह एक फ़लस्तीनी संगठन है.
माइक वुलरिज का कहना है कि अगर यह टेप वाक़ई सही है तो एलन जॉन्सटन के अपहरण के मामले में वाक़ई यह एक महत्वपूर्ण प्रगति है. ग़ौरतलब है कि एलन जॉन्सटन ऐसे पश्चिमी पत्रकार हैं जिन्हें ग़ज़ा में सबसे ज़्यादा समय तक अगवा करके रखा गया है.
एलन जॉन्सटन को रिहा किए जाने के लिए अनेक देशों में रैलियाँ भी हुई हैं और संयुक्त राष्ट्र महासचिव बान की मून, ब्रिटेन के प्रधानमंत्री टोनी ब्लेयर जैसी हस्तियाँ भी उनकी रिहाई की अपील करने वालों में शामिल हैं.
एलन जॉन्सटन ने 1991 में बीबीसी वर्ल्ड सर्विस के लिए काम करना शुरू किया था 16 साल के इस करियर में से आठ साल वह संवाददाता के रूप में काम करते रहे हैं. उन्होंने उज़बेकिस्तान और अफ़ग़ानिस्तान में भी रिपोर्टंग की है.
वह पिछले क़रीब तीन साल से ग़ज़ा से रिपोर्टिंग कर रहे थे और उन्होंने वहीं अपना निवास भी बना रखा था. ग़ज़ा में हिंसक हालात में वह अकेले ऐसे पश्चिमी पत्रकार हैं जो स्थायी रूप से वहीं रह रहे थे.