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बुधवार, 02 मई, 2007 को 14:08 GMT तक के समाचार

तुर्की: प्रधानमंत्री ने फ़ैसले की निंदा की

तुर्की में राष्ट्रपति चुनाव के पहले चरण को ख़ारिज करने के संवैधानिक कोर्ट के फ़ैसले को प्रधानमंत्री एर्दोग़ान ने 'लोकतंत्र पर दागी गई गोली' बताया है.

उनका कहना था कि कोर्ट के फ़ैसले के चलते नया राष्ट्रपति चुनना एक तरह से असंभव हो जाएगा.

इस चुनाव में विदेश मंत्री अब्दुला गुल एकमात्र उम्मीदवार थे लेकिन विपक्ष ने पहले चरण के मतदान का बहिष्कार किया था.

चुनाव में 361 लोगों ने मत डाला था जिसमें से 357 ने अब्दुला गुल के पक्ष में मत डाला. लेकिन कोर्ट का कहना है कि कोरम बनाने के लिए 367 लोगों का मतदान में हिस्सा लेना ज़रूरी था.

विपक्षी पार्टियों का कहना है कि अब्दुल गल तुर्की के धर्मनिर्पेक्ष संविधान के प्रति समर्पित नहीं हैं. धर्मनिरपेक्ष दल अब्दुल्ला गुल पर कट्टरपंथी इस्लामी एजेंडो को आगे बढ़ाने का आरोप लगा रहे हैं.

पहले चरण के लिए अब रविवार को दोबारा मतदान होगा. सत्ताधारी जस्टिस एंड डिवेलपमेंट पार्टी ने प्रस्ताव दिया है कि आम चुनाव समय से पहले 24 जून को ही करवा दिए जाएँ. ये चुनाव पहले नवंबर में होने वाले थे.

सरकार ने ये भी कहा है कि संविधान में बदलाव होना चाहिए ताकि मतदाता सीधे राष्ट्रपति को चुन सकें.

सेना की स्थिति

रविवार को हज़ारों लोगों ने इस्तांबुल में धर्मनिर्पेक्षता के पक्ष में रैली की थी.

कोर्ट के फ़ैसले के बावजूद सरकारी प्रवक्ता सेमिल सिसेक ने कहा है सत्तारूढ़ एके पार्टी जल्दी ही अपने उम्मीदवार की दावेदारी फिर से पेश करेगी.

तुर्की में राष्ट्रपति चुनाव को लेकर जारी विवाद में सेना भी कूद गई है.

सेना ने स्थिति पर चिंता जताते हुए कहा है कि वह देश में धर्मनिर्पेक्ष शासन प्रणाली की रक्षक है और ज़रूरत पर अपनी स्थिति दर्शाने में हिचकिचाएगी नहीं.

आधुनिक तुर्की की स्थापना धर्मनिर्पेक्षता के सिद्धांत पर की गई थी और पारंपरिक रूप से अब तक तुर्की के सभी राष्ट्रपति धर्मनिर्पेक्षता के समर्थक रहे हैं.

सेना ने कहा है कि वह पूरी चुनाव प्रक्रिया पर नज़र रखी हुई है. सेना के बयान में कहा गया है,''यह नहीं भूलना चाहिए कि इस बहस में सेना एक पक्ष है और धर्मनिर्पेक्षता की मज़बूत रक्षक भी.''