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सोमवार, 30 अप्रैल, 2007 को 06:39 GMT तक के समाचार

'चीन में ओलंपिक की आड़ में दमन'

दुनियाभर में मानवाधिकारों पर नज़र रखने वाली संस्था एमनेस्टी इंटरनेशनल का कहना है कि वर्ष 2008 के ओलंपिक खेलों की आड़ में चीन स्थिरता के नाम पर असंतुष्टों और विरोधियों का दमन कर रहा है.

एमनेस्टी इंटरनेशनल की रिपोर्ट में चीन सरकार द्वारा किए गए कुछ सुधारों का स्वागत किया गया है, लेकिन बग़ैर मुक़दमा चलाए लोगों को हिरासत में रखने और मीडिया तथा इंटरनेट पर कड़े नियंत्रण के लिए सरकार की आलोचना की है.

एमनेस्टी का कहना है कि चीन मानवाधिकारों में सुधार के अपने वायदे को पूरा नहीं कर सका है.

हालाँकि चीन ने इस रिपोर्ट पर आधिकारिक प्रतिक्रिया व्यक्त नहीं की है.

रिपोर्ट में कहा गया है कि अगस्त 2008 में होने वाले ओलंपिक खेल मानवाधिकार रक्षकों, जाने-माने वकीलों और मानवाधिकार उल्लंघन की शिकायत करने वालों से सख्ती से निपटने के लिए 'उत्प्रेरक' का काम कर रहे हैं.

आशंका

रिपोर्ट में आशंका जताई गई है कि बीजिंग से छोटे-मोटे अपराधियों, भिखारियों और नशेड़ियों को हटाने के लिए उस क़ानून का इस्तेमाल किया जा सकता है, जिसके तहत किसी संदिग्ध को बिना मुक़दमा चलाए चार साल तक जेल में रखा जा सकता है.

एमनेस्टी ने मृत्युदंड क़ानून में सुधार और विदेशी पत्रकारों को अधिक स्वतंत्रता देने के लिए चीन सरकार की सराहना की है.

रिपोर्ट में अंतरराष्ट्रीय ओलंपिक समिति (आईओसी) से आग्रह किया गया है कि वो मानवाधिकार मामलों को चीन सरकार के समक्ष उठाए.

एमनेस्टी के एशिया प्रशांत क्षेत्र की उप निदेशक कैथरीन बाबेर ने कहा, "आईओसी हरगिज़ नहीं चाहेगी कि ओलंपिक पर मानवाधिकार उल्लंघन का दाग लगे. फिर चाहे वह खेल मैदान बनाने के लिए लोगों को जबरन उनके घरों से निकालने की घटनाएँ हो या फिर बड़ी संख्या में शांतिपूर्ण कार्यकर्ताओं को उनके घरों में नज़रबंद करने की शिकायतें."

लेकिन आईओसी के कार्यकारी मंडल ने कहा है कि वह खेल संगठन है और उसकी कोई राजनीतिक भूमिका नहीं है.