सोमवार, 23 अप्रैल, 2007 को 14:43 GMT तक के समाचार
रूस के पूर्व राष्ट्रपति बोरिस येल्तसिन के अंतिम संस्कार की तैयारियाँ मॉस्को में चल रही हैं. उनका निधन दिल का दौरा पड़ने से सोमवार को हुआ था.
उनका शव जनता के दर्शन के लिए मॉस्को के मध्य में स्थित 'क्राइस्ट द सेवियर' कैथेड्रल में रखा जाएगा.
इसके बाद बुधवार को उनका अंतिम संस्कार किया जाएगा. रूस में बुधवार को राष्ट्रीय शोक दिवस घोषित किया गया है.
दुनिया भर के शीर्ष नेताओं ने सोवियत संघ के विघटन के बाद लोकतांत्रिक ढंग से चुने गए रूस के पहले राष्ट्रपति येल्तसिन को श्रद्धांजलि अर्पित की है.
येल्तसिन के उत्तराधिकारी राष्ट्रपति व्लादिमिर पुतिन ने येल्तसिन को 'रूसी लोकतंत्र का जनक' बताया है.
करिश्माई नेतृत्व
कम्युनिस्ट शासन को ख़त्म करके लोकतंत्र लागू करने में उनकी अहम भूमिका रही.
वर्ष 1991 में मिखाइल गोर्बाचौफ़ को सत्ता से हटाने की कोशिशों के दौरान बोरिस येल्तसिन को 'लोकतंत्र के रक्षक' के रूप में खासी लोकप्रियता मिली थी जब वे मॉस्को में एक टैंक पर चढ़ गए थे.
बोरिस येल्तसिन ने आदेश दिया था कि रूसी टैकों को देश की संसद पर दागा जाए.
उस समय संसद में उनके कट्टरपंथी राजनीतिक प्रतिद्वंद्वी घुसे हुए थे.
इसके अलावा उन्होंने कई आर्थिक सुधार भी किए, जिसके बारे में कहा जाता है कि इससे कुछ लोग बहुत अमीर हो गए और बहुत से लोगों की हालत दयनीय हो गई.
उन पर व्यक्तिगत जीवन में चिड़चिड़ा होने और बहुत अधिक शराब पीने के आरोप थे लेकिन चेचन्या के ख़िलाफ़ सैन्य कार्रवाई के कारण उनकी छवि को भारी नुक़सान पहुँचा.
वे आठ साल रूस के राष्ट्रपति रहे फिर उन्होंने व्लादिमीर पुतिन को अपना उत्तराधिकारी चुना.
'नए युग की शुरुआत की'
रूसी राष्ट्रपति पुतिन ने कहा है कि येल्तसिन ने एक नए युग की शुरुआत की, जिसमें एक स्वतंत्र और लोकतांत्रिक रूस था.
उन्होंने कहा, "उन्होंने जो कुछ भी किया, उसमें यह सुनिश्चित किया कि वह लोगों के लिए नैतिक और राजनीतिक रुप से एक उदाहरण बने."
अमरीकी राष्ट्रपति जॉर्ज बुश ने येल्तसिन को श्रद्धांजलि देते हुए कहा है कि उन्होंने ऐसे समय में देश का नेतृत्व किया जब देश में परिवर्तन का दौर चल रहा था.
पूर्व सोवियत संघ के नेता मिखाइल गोर्बाचौफ़ ने कहा कि बोरिस येल्तसिन ने रूस के लिए कई अहम काम किए लेकिन कई ग़लतियाँ भी कीं.
ब्रितानी प्रधानमंत्री टोनी ब्लेयर ने कहा है कि रूस के इतिहास में येल्तसिन ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई.
चेचन्या विवाद
1991 के बाद वे 1996 में दोबारा राष्ट्रपति चुने गए. उसी दौरान उनकी बाईपास सर्जरी हुई.
90 के दशक में रूस में बड़े पैमाने पर हुए निजीकरण के दौरान देश की बागडोर उन्हीं के हाथ में थी. 1994 में उन्होंने चेचन्या के ख़िलाफ़ सैन्य अभियान भी शुरू किया था.
वर्ष 2000 में एक साक्षात्कार में बोरिस येल्तसिन ने कहा था कि चेचन्या में लोगों के मारे जाने को वे अपने ऊपर आई सबसे बड़ी ज़िम्मेदारी के रूप में देखते हैं.
लेकिन साथ ही उन्होंने कहा था कि और कोई विकल्प नहीं था और रूस को चेचन चरमपंथियों के ख़िलाफ़ क़दम उठाने पड़े थे.
बोरिस येल्तसिन का कहना था, "चेचन्या में जो कुछ हुआ, कितने ही माता-पिता के दुखों के लिए दोष मैं किसी और पर दोष नहीं डाल सकता. मैने वो फ़ैसला किया था और इसलिए मैं ही ज़िम्मेदार हूँ."
बीसवीं सदी के आख़िरी दिन बोरिस येल्तसिन ने पद छोड़ दिया और सत्ता की कमान व्लादीमिर पुतिन के हाथ सौंप दी थी.