http://www.bbcchindi.com

शनिवार, 21 अप्रैल, 2007 को 11:35 GMT तक के समाचार

इसराइल के लिए जासूसी करने पर सज़ा

मिस्र की एक अदालत ने इसराइल के लिए जासूसी करने के आरोप में एक व्यक्ति को 15 साल क़ैद की सज़ा सुनाई है. मोहम्मद अल अतर को मिस्र और कनाडा की दोहरी नागरिकता मिली हुई है.

काहिरा की अदालत ने मोहम्मद अल अतर को इसराइल की ख़ुफ़िया एजेंसी मोसाद के लिए जासूसी करने का दोषी ठहराया है. 31 वर्षीय अतर ने पहले तो अपना दोष स्वीकार कर लिया लेकिन बाद में कहा कि उन्होंने प्रताड़ित किए जाने के कारण आरोप स्वीकार किया था.

अतर के साथ-साथ इसराइल के तीन लोगों को भी इस मामले में दोषी ठहराया गया. अदालत ने इन चारों को 15 साल क़ैद के साथ-साथ 10 हज़ार पाउंड (मिस्र) का जुर्माना भी लगाया.

काहिरा के अल अज़हर यूनिवर्सिटी के पूर्व छात्र रह चुके मोहम्मद अल अतर पर आरोप था कि उन्होंने तुर्की में इसराइली एजेंटों से संपर्क किया और जासूसी की.

इनकार

अतर ने अपना दोष स्वीकार करते हुए जिस दस्तावेज़ पर हस्ताक्षर किए थे, वह कनाडा के एक अख़बार से जुड़े पत्रकार ने देखा था. अख़बार के मुताबिक़ उस दस्तावेज़ में इसका ज़िक्र था कि अतर ने जासूसी करने के लिए समलैंगिकों या ग़रीब अरबों को नियुक्त किया था.

अतर ने इससे इनकार किया था कि वह समलैंगिक है हालाँकि उसने इसी आधार पर संयुक्त राष्ट्र में शरणार्थी के लिए याचिका दायर की थी. अदालती कार्यवाही के क्रम में एक बार पत्रकारों से बात करते हुए अतर ने इस बात पर ज़ोर दिया था कि वे निर्दोष हैं.

उन्होंने कनाडा की सरकार से सहायता की अपील की थी और मांग की थी कि उन्हें वकील उपलब्ध कराया जाए. दूसरी ओर इसराइली अधिकारियों का कहना है कि उन्हें इस मामले की जानकारी मीडिया के माध्यम से मिली.

वैसे मानवाधिकार संगठन कहते रहे हैं कि मिस्र की सुरक्षा एजेंसी पूछताछ के लिए प्रताड़ना के कई तरीक़े अपनाती है और इसमें यौन शोषण भी शामिल है. हालाँकि सरकार इससे इनकार करती है लेकिन उसने प्रताड़ना के कई आरोपों की जाँच कराई है.