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बुधवार, 18 अप्रैल, 2007 को 15:22 GMT तक के समाचार

उसकी आँखों में भारत का ही सपना था

अमरीका के वर्जीनिया टेक विश्वविद्यालय में सोमवार को हुई गोलीबारी में जान गँवाने वाली भारतीय छात्रा मीनल पांचाल शिक्षकों की प्रिय और बहुत ही मेहनती होने के साथ-साथ सुसंस्कृत युवती थी.

26 वर्षीय मीनल पांचाल एक अच्छी आर्किटेक्ट बनने का सपना लेकर मुंबई से अमरीका गई थीं. उनका यह भी सपना था कि वह उच्च शिक्षा पूरी करके भारत वापस लौटकर वहीं अपना भविष्य संवारेंगी.

मुंबई में मीनल के एक शिक्षक रह चुके प्रोफ़ेसर अख़्तर चौधरी का कहना है कि वहाँ से अमरीका जाते वक़्त मीनल ने वादा किया था कि वह पढ़ाई पूरी करके भारत आएंगी लेकिन नियति को शायद कुछ और ही मंज़ूर था.

प्रोफ़ेसर अख़्तर चौधरी का कहना है कि मीनल एक बहुत मेहनती और सुसंस्कृत विद्यार्थी थी.

मुंबई निवासी पांचाल वर्जीनिया टेक विश्वविद्यालय में प्रथम वर्ष की छात्रा थीं और इस गोलीबारी का शिकार होने वाली वो दूसरी भारतीय हैं.

मीनल ने 1998 से 2003 तक मुंबई के बांद्रा में रिज़वी कॉलेज में आर्किटेक्चर की पढ़ाई की थी.

मीनल को पढ़ा चुकी प्रोफ़ेसर प्रदान्या चौहान का कहना है कि मीनल एक शर्मीली और संवेदनशील लड़की थी.

प्रोफ़ेसर प्रदान्या चौहान का कहना था, "मीनल को मैं इसलिए नज़दीक से जानती थी कि वह मेरे साथ कुछ स्टडी टूर पर भी गई थीं. वह अपने दोस्तों के साथ भी काफ़ी घुलमिलकर रहती थीं. मीनल उस तरह की लड़की नहीं थीं कि खुलकर किसी मंच वग़ैरा पर आतीं लेकिन शिक्षा को लेकर वह काफ़ी गंभीर भी थीं और बहुत बुद्धिमान भी."

समाचार एजेंसियों के अनुसार, ''भारतीय दूतावास के एक वरिष्ठ अधिकारी ने मंगलवार को बताया कि दूतावास को यह दुखद सूचना मिली कि भारतीय अमरीकी प्रोफेसर जी वी लोगनथान के अलावा प्रथम वर्ष की छात्रा मीनल पांचाल भी मृतकों में शामिल हैं.''

मुंबई में मीनल पांचाल के पड़ोसियों को भी इस ख़बर पर काफ़ी दुख हुआ है.

उनकी एक पड़ोसी शोभना भिवंडीकर ने बीबीसी से बातचीत में कहा, "जब से मीनल के ग़ायब होने की ख़बरें आई थीं तभी से हम लोग उसके जीवित मिलने की प्रार्थना कर रहे थे लेकिन बुधवार सुबह को यह बुरी ख़बर मिल गई कि मीनल की जान भी चली गई."

शोभना भिवंडीकर का कहना था कि वे मीनल के परिवार को 15-16 वर्षों से जानती थीं और ख़ुद मीनल एक बहुत सभ्य, सुसंस्कृत और बुद्धिमान लड़की थी.

भारतीय की मौत

कई छात्रों ने शिकायत की है कि उन्हें पहली गोलीबारी के बाद सूचना देने में बहुत देरी की गई. दूसरी गोलीबारी के समय ही एक ईमेल के ज़रिए छात्रों को पहली घटना के बारे में बताया गया था.

एक छात्र बिली बैसन ने कहा, "यूनिवर्सिटी की ज़िम्मेदारी बनती है, उन्होंने पहली घटना के बाद कोई क़दम नहीं उठाया."

लेकिन विश्वविद्यालय अधिकारियों का कहना है कि इस तरह की कोई घटना दोबारा हो सकती है इसकी कल्पना कोई नहीं कर सकता था.

इस गोलीबारी में मारे गए लोगों में भारतीय मूल के एक प्रोफ़ेसर वी लोगनाथन भी शामिल हैं.

बीबीसी के साथ बातचीत में उनके परिवारजनों ने बताया कि मंगलवार की सुबह उनकी मौत के बारे में जानकारी मिली.

लोगनाथन तमिलनाडु के कोयंबटूर ज़िले के रहने वाले थे और वो कानपुर आईआईटी के छात्र रहे थे. वो वर्जीनिया तकनीक विश्वविद्यालय के सिविल और पर्यावरण इंजीनियरिंग विभाग में प्रोफ़ेसर थे.