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बुधवार, 18 अप्रैल, 2007 को 14:39 GMT तक के समाचार

दो महीनों में सबसे हिंसक दिन, 180 मौतें

इराक़ की राजधानी ब़गदाद और आस पास के इलाक़ों में हुए छह बम हमलों में 180 से अधिक लोग मारे गए हैं जबकि दो सौ से ज़्यादा लोगों के घायल होने के समाचार हैं.

दो महीने पहले अमरीका की अगुआई में शुरु किए गए विशेष सुरक्षा अभियान के बाद यह सबसे व्यापक हिंसा का दिन रहा है.

अमरीकी रक्षा मंत्री राबर्ट गेट्स ने इन हमलों को ख़ौफनाक क़रार देते हुए कहा अल क़ायदा पर आरोप लगाया है.

सबसे अधिक जानें गईं शिया बहुल इलाके़ सद्र सिटी के सदरिया बाज़ार में हुए कार बम धमाके में जहां कम से कम 140 लोगों के मारे जाने की ख़बर है.

सदरिया मार्केट को फ़रवरी के भीषण बम धमाके के बाद फिर से बनाया गाय था. उल्लेखनीय है कि फ़रवरी महीने में हुए धमाके में यहां 130 से अधिक लोग मारे गए थे.

बग़दाद के ही एक अन्य शिया बहुल इलाक़े कर्रादा ज़िले में एक अस्पताल के पास बम विस्फोट हुआ जिसमें बड़ी संख्या में लोग मारे गए हैं.

इराक़ में अन्य स्थानों पर हुए बम धमाकों में कई लोगों के मारे जाने और घायल होंने के भी समाचार है.

राजधानी बग़दाद के भीतर और बाहर अनेक अन्य बम विस्फोट होने की भी ख़बरें मिली हैं. उनमें से एक विस्फोट में चार पुलिसकर्मियों के मारे जाने की ख़बर है.

हाल के महीनों में इराक़ में कार बम विस्फोट और आत्मघाती हमलों की घटनाएँ लगभग हर रोज़ हो रही हैं. हालाँकि फ़रवरी 2007 में अमरीकी सेना के नेतृत्व में एक सुरक्षा अभियान शुरू किया गया था.

शिया बहुल सद्र सिटी और कर्रादा ज़िले में हाल के दिनों में अनेक हमले हुए हैं.

समाचार एजेंसी एपी के अनुसार सद्र सिटी में बुधवार को हुए बम विस्फोट में लगभग आठ वाहन बिल्कुल तबाह हो गए.

कर्रादा ज़िले में एक निजी अस्पताल के पास एक वाहन में विस्फोटक भरा हुआ था जिसमें सड़क पर भी धमाका किया गया.

उधर अमरीकी सेना ने कहा है कि उसके जवानों ने अनबर प्रांत में फलूजा के निकट एक छापे में पाँच लड़ाकों को मार दिया है. सेना ने कहा है कि इस छापे के दौरान तीस लोगों को हिरासत में भी लिया गया.

ये धमाके ऐसे समय हुए हैं जब इराक़ी शरणार्थियों की समस्या की तरफ़ अंतरराष्ट्रीय समुदाय का ध्यान दिलाने के लिए संयुक्त राष्ट्र की शरणार्थी एजेंसी की देखरेख में एक सम्मेलन में जेनेवा में हो रहा है.

संयुक्त राष्ट्र का अनुमान है कि इराक़ में हो रही हिंसा की वजह से हर महीने लगभग पचास हज़ार लोग देश छोड़कर भाग रहे हैं.