मंगलवार, 17 अप्रैल, 2007 को 08:53 GMT तक के समाचार
अमरीका के वर्जीनिया विश्वविद्यालय में हुई गोलीबारी में एक भारतीय मूल के प्रोफ़ेसर जी वी लोगनाथन भी मारे गए हैं.
बीबीसी के साथ बातचीत में उनके परिवारजनों ने बताया कि मंगलवार की सुबह उनकी मौत के बारे में जानकारी मिली.
लोगनाथन तमिलनाडु के कोयंबटूर ज़िले के रहनेवाले थे और वो कानपुर आईआईटी के छात्र रहे थे. वो वर्जीनिया तकनीक विश्वविद्यालय के सिविल और पर्यावरण इंजीनियरिंग विभाग में प्रोफ़ेसर थे.
दूसरी ओर वर्जीनिया विश्वविद्यालय में गोलीबारी को लेकर प्रशासन की ओर से चेतावनी देने में कथित तौर पर हुई देरी को लेकर लोगों में नाराज़गी है.
ग़ौरतलब है कि गोलीबारी की इस घटना में संदिग्ध हमलावर समेत 33 लोग मारे गए थे.
वर्जीनिया तकनीकी विश्वविद्यालय में गोलीबारी की दो घटनाएँ हुईं. पहली घटना में दो लोग मारे गए जबकि दो घंटे बार हुई गोलीबारी की दूसरी घटना में 31 लोग मारे गए थे.
छात्र सवाल उठा रहे हैं कि पहली घटना के बाद विश्वविद्यालय परिसर को क्यों नहीं बंद कर दिया गया था.
लेकिन विश्वविद्यालय के अधिकारी अपनी कार्रवाई को सही ठहराते हैं. उनका कहना है कि उन्हें दूसरी घटना की आशंका नहीं थी.
अमरीकी राष्ट्रपति कार्यालय व्हाइट हाउस ने कहा है कि इस घटना से राष्ट्रपति जॉर्ज बुश 'आहत' हुए हैं.
उन्होंने कहा है, "स्कूल सुरक्षित और ज्ञान अर्जन के पवित्र स्थान होने चाहिए. जब इस पवित्र स्थान में गड़बड़ी होगी तो इसका असर अमरीका की सभी शिक्षण संस्थाओं और पूरे अमरीकी समुदाय पर पड़ेगा."
सवाल
दो घंटों के अंतराल पर क्लासरूम में गोलीबारी हुई और पुलिस का कहना है कि बंदूकधारी ने 32 लोगों की हत्या के बाद ख़ुद को भी गोली मार ली.
अधिकारियों ने अगले आदेश तक विश्वविद्यालय को बंद कर दिया है.
विश्वविद्यालय के भारतीय छात्र संघ के अध्यक्ष अजितपाल रैना ने बीबीसी को बताया कि अभी तक इस हमले में किसी भारतीय छात्र के हताहत होने की ख़बर नहीं है.
उन्होंने बताया कि इस विश्वविद्यालय में भारतीय मूल के क़रीब एक हज़ार छात्र पढ़ते हैं और भारतीय मूल के तकरीबन 70 अध्यापक भी हैं.
अभी तक इस गोलीबारी को लेकर कई सवालों के जवाब मिलने बाक़ी हैं. पुलिस ने अभी तक यह नहीं कहा है कि दोनों घटनाओं के लिए ज़िम्मेदार एक ही शख्स था.
उन्होंने हमलावर की पहचान भी स्पष्ट नहीं की है. हालांकि उनका कहना है कि बंदूकधारी की प्रारंभिक पहचान हो गई है.
एक प्रत्यक्षदर्शी छात्रा ने बताया कि एक युवक उनकी कक्षा में दो बार आया और उसने वहाँ मौजूद लगभग सभी को गोली मारने की कोशिश की.
इसके बाद जब पुलिस ने वहाँ पहुँचने की कोशिश की तो पाया कि विश्वविद्यालय का हॉल अंदर से ज़ंजीर से बंद था.