मंगलवार, 17 अप्रैल, 2007 को 13:29 GMT तक के समाचार
मिस्र में अधिकारियों ने कहा है कि देश की परमाणु ऊर्जा एजेंसी के बारे में इसराइल के लिए जासूसी करने वाले एक इंजीनियर को गिरफ़्तार किया है.
मिस्र के एक अधिकारी हिशम बदावी का कहना है कि यह इंजीनियर देश की परमाणु ऊर्जा एजेंसी में काम करता रहा है.
हिशम बदावी ने पत्रकारों को बताया कि इस इंजीनियर ने धन बनाने के इरादे से परमाणु ऊर्जा एजेंसी से कुछ रिपोर्टें हासिल की थीं.
इस मामले में दो और लोग भी वांछित हैं जिनमें एक आयरलैंड का ब्रायन पीटर और दूसरा जापान का शीरो ईज़ो बताया गया है.
अधिकारियों ने कहा है कि मिस्र के इस इंजीनियर को 18 फ़रवरी को गिरफ़्तार किया गया था लेकिन जाँच पूरी करने तक इस सूचना को गुप्त रखा गया था.
एक सरकारी वक्तव्य में इस इंजीनियर का नाम मोहम्मद सैयदद साबिर अली बताया गया है जिसकी उम्र 35 वर्ष है.
मिस्र में अनुसंधान के लिए एक परमाणु रिएक्टर है लेकिन मिस्र ने 2006 में घोषणा की थी कि वह अपना परमाणु ऊर्जा कार्यक्रम फिर से चलाने की योजना बना रहा है जो असैनिक उद्देस्यों के लिए होगा.
मिस्र परमाणु अप्रसार संधि पर दस्तख़त करने वाले देशों में से एक है. इस संधि के तहत सदस्य देशों को अंतरराष्ट्रीय निगरानी के तहत अपना परमाणु कार्यक्रम ऊर्जा उद्देश्यों के लिए चलाने की इजाज़त होती है.
इसराइल ने परमाणु अप्रसार संधि पर दस्तख़त नहीं किए हैं और समझा जाता है कि मध्य पूर्व क्षेत्र में एक वही ऐसा देश है जिसके पास परमाणु हथियार हैं हालाँकि इसराइल ने अपने पास परमाणु हथियार होने या नहीं होने के बारे में अभी स्पष्ट रूप से कुछ नहीं कहा है.
मिस्र और इसराइल के बीच दशकों की अदावत 1970 में हुए कैम्प डेविड समझौते से ख़त्म हुई थी लेकिन दोनों देशों के बीच जासूसी के अनेक आरोपों और मामलों की वजह से संबंध कुछ तनावपूर्ण रहे हैं.
मिस्र ने सितंबर 2006 में कहा था कि वह अपना परमाणु ऊर्जा कार्यक्रम फिर से शुरू करना चाहता है जिसे क़रीब बीस साल पहले तत्कालीन सोवियत संघ में हुई चैर्नोबिल परमाणु दुर्घटना के बाद बंद कर दिया गया था.
मिस्र में ऊर्जा की ज़रूरत हर साल औसतन सात प्रतिशत की दर से बढ़ रही है और देश में बिजली कटौती का भारी संकट है.