रविवार, 15 अप्रैल, 2007 को 19:42 GMT तक के समाचार
ऐसी ख़बरें हैं कि ईरान के सुप्रीम कोर्ट ने कई हत्याएँ करने के पाँच अभियुक्तों को रिहा कर दिया है.
अभियुक्तों का कहना था कि जो लोग मादक द्रव्यों का कारोबार करते हों या विवाहेतर शारीरिक संबंध बनाते हों, तो दो बार चेतावनी देने के बाद उन्हें मारने में कोई गलती नहीं है और इस्लाम इसकी अनुमति देता है.
अदालत ने उनकी इस दलील को स्वीकार कर लिया.
संवाददाताओं का कहना है कि ईरान में यह मामला अब अहम हो गया है कि क्या इस्लाम के झंडाबरदार न्यायिक प्रक्रिया को अपने हाथ में ले सकते हैं और क़ानून के शाषण पर सवाल उठा सकते हैं.
ये हत्यायें केरमन शहर में वर्ष 2002 में हुई थीं. एक साल के भीतर 18 लोगों की हत्याएँ हुईं और इस मामले में पाँच लोगों के ख़िलाफ़ मुक़दमा चला.
अभियुक्तों ने जो इक़बालिया बयान दिए हैं, उनके मुताबिक कुछ लोगों को गड्ढे में गिराने के बाद पत्थर मार-मार कर मार डाला गया. एक व्यक्ति को ज़िदा दफ़न कर दिया गया जबकि कईयों को रेगिस्तान में खुला छोड़ दिया गया.
अभियुक्तों ने अदालत में अपनी दलील में कहा कि उन्हें यही बताया गया है कि अनैतिक कार्यों में लिप्त लोग यदि चेतावनी देने से भी नहीं मानें तो उन्हें मारा जा सकता है.
मारे गए लोगों के परिजनों का कहना था कि पाँच बार ऐसा हुआ जब सुप्रीम कोर्ट ने निचली अदालतों के फ़ैसले को पलट दिया हो.