शुक्रवार, 13 अप्रैल, 2007 को 22:08 GMT तक के समाचार
फ़लस्तीन में एक माह पहले लापता हुए बीबीसी संवाददाता ऐलन जॉन्सटन की रिहाई के लिए जारी ऑनलाइन याचिका में 30 हज़ार हस्ताक्षर हो चुके हैं.
इस याचिका के माध्यम से अपील की गई है कि बीबीसी संवाददाता को जल्द से जल्द छोड़ दिया जाना चाहिए.
माना जा रहा है कि क़रीब एक महीना पहले कुछ नक़ाबपोश बंदूकधारियों ने ऐलन जॉन्सटन का फ़लस्तीनी क्षेत्र ग़ज़ा में अपहरण कर लिया गया था. उनके पते-ठिकाने के बारे में अभी कोई पता नहीं चल सका है.
उधर फ़लस्तीनी प्रधानमंत्री के प्रवक्ता ने बताया है कि सुरक्षा एजेंसियाँ रात-दिन बीबीसी संवाददाता को रिहा कराने की कोशिश में लगी हुई हैं.
अल ज़ज़ीरा टीवी से बातचीत करते हुए उन्होंने कहा कि जोन्सटन के बारे में और ज़्यादा जानकारी फ़लस्तीनी अधिकारियों तक पहुँच रही है और अगले कुछ दिनों में कुछ प्रगति होने की संभावना है.
रिहाई की अपील
इससे पहले गुरुवार को संयुक्त राष्ट्र महासचिव बान की-मून ने भी कहा था कि बीबीसी संवाददाता ऐलन जॉन्सटन को तत्काल रिहा कर दिया जाना चाहिए.
साथ ही ऐलन जॉन्सटन के पिता ने उनका अपहरण करने वालों से सीधी अपील की थी कि वे ऐलन को रिहा कर दें.
जॉन्सटन के पिता ने एक खुले पत्र में लिखा था, "आपका भी परिवार होगा. ज़रा सोचिए कि आप मेरे परिवार के लिए क्या कर रहे हैं. कृपया मेरे बेटे को आज ही छोड़ दीजिए".
ऐलन जॉन्सटन ने बीबीसी वर्ल्ड सर्विस में 1991 में सेवाएँ शुरू की थीं और तब से क़रीब आठ साल वह संवाददाता के तौर पर काम कर चुके हैं. इस दौरान वह उज़बेकिस्तान और अफ़ग़ानिस्तान में से भी रिपोर्टिंग कर चुके हैं.
ऐलन जॉन्सटन क़रीब तीन साल से ग़ज़ा में रहकर वहाँ से रिपोर्टिंग कर रहे थे और वह अकेले ऐसे पश्चिमी पत्रकार थे जो ख़तरनाक हालात होने के बावजूद वहीं रहकर रिपोर्टिंग कर रहे थे. ग़ज़ा में उनकी पोस्टिंग गत मार्च के अंत में समाप्त होने वाली थी.