शुक्रवार, 06 अप्रैल, 2007 को 15:36 GMT तक के समाचार
ईरान में बंदी बनाए गए 15 ब्रितानी नौसैनिकों में से सात ने लंदन लौटने के बाद कहा है कि उन्हें ग़ैरक़ानूनी रूप से बंदी बनाया गया था और उनके साथ दुर्व्यवहार किया गया.
दो सप्ताह तक ईरान की हिरासत में रहे इन नौसैनिकों ने एक संयुक्त बयान जारी किया है और कहा है कि उन्हें उस समय पकड़ा गया जब वे इराक़ी जलसीमा में थे ना कि ईरानी जलसीमा में. नौसैनिकों ने कहा कि उन पर लगातार मनोवैज्ञानिक दबाव बनाया गया.
कैप्टन क्रिस एयर ने बीबीसी को बताया कि उन्हें 12 दिनों तक अलग-अलग रखा गया. उन्होंने बताया कि एक बार तो उन्हें दीवार के सहारे खड़ा कर दिया गया और बंदूकें तान दी गईं.
कैप्टन क्रिस एयर का कहना है कि ईरान में लोकप्रियता हासिल करने के लिए उनका इस्तेमाल किया गया.
दावा
हालाँकि ईरान कहता रहा है कि ब्रितानी नौसैनिकों को उस समय गिरफ़्तार किया गया जब वे ईरान जलसीमा में थे.
ब्रिटेन ने घटना की समीक्षा के आदेश दिए हैं. बुधवार को ईरान के राष्ट्रपति महमूद अहमनदीनेजाद ने इन नौसैनिकों की रिहाई के आदेश दिए थे और कहा था कि रिहाई ब्रिटेन को एक तोहफ़ा है.
गुरुवार को ये नौसैनिक तेहरान से लंदन पहुँचे. अब उन्होंने एक संयुक्त बयान में इस बात पर ज़ोर दिया है कि उन्होंने ईरान की जलसीमा का उल्लंघन नहीं किया था. हालाँकि ईरान टेलीविज़न पर उन्होंने स्वीकार किया था कि वे ईरान की जलसीमा में घुस गए थे.
लंदन पहुँचने के बाद इन नौसैनिकों ने बताया है कि उन पर मनोवैज्ञानिक दबाव बनाया गया था.
इससे पहले ब्रितानी नौसेना रॉयल नेवी के प्रमुख लॉर्ड एडमिरल सर जोनाथन बैंड ने नौसैनिकों की आलोचना को दरकिनार करते हुए कहा कि उन्होंने जो किया वो उचित था.
उन्होंने कहा कि नौसैनिकों ने कठिन परिस्थितियों में अच्छी तरह व्यवहार किया.