सोमवार, 02 अप्रैल, 2007 को 13:36 GMT तक के समाचार
इराक़ में अभियोजन पक्ष के वकीलों ने कुर्दों के नरसंहार के मामले में सद्दाम हुसैन के चचेरे भाई अली हसन अल माजिद यानी केमिकल अली समेत पाँच लोगों को मौत की सज़ा देने की माँग की है.
अनफ़ाल मुक़दमा 1980 के दशक में कुर्दों के ख़िलाफ़ हुई कार्रवाई से संबंधित है जिसमें बड़ी संख्या में कुर्द मारे गए थे. माना जाता है कि कुर्दों के ख़िलाफ़ इस कार्रवाई में केमिकल अली का प्रमुख हाथ था.
आरोप ये भी है कि कुर्दों के ख़िलाफ़ ज़हरीले गैस का इस्तेमाल हुआ और इसी कारण अली हसन अल माजिद को केमिकल अली कहा जाने लगा.
मुक़दमे की सुनवाई के दौरान केमिकल अली ने यह स्वीकार किया था कि उन्होंने कई गाँवों को नष्ट करने का आदेश दिया था. उन्होंने यह कहते हुए कुर्दों के ख़िलाफ़ कार्रवाई का आदेश दिया था कि ये गाँव ईरानी एजेंटों से भरे हैं.
मांग
मुक़दमे को 16 अप्रैल तक स्थगित कर दिया है. अब बचाव पक्ष के वकील अपनी बात रखेंगे. सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष के वकील मुन्क़ीथ अल फ़ारून ने अदालत से पाँचों को दोषी ठहराते हुए कड़ी से कड़ी सज़ा देने की माँग की.
वकील ने कहा कि इन लोगों ने बुज़ु्र्गों, महिलाओं और बच्चों को नहीं बख़्शा. साथ ही जानवरों और पेड़
-पौधों को भी ख़त्म कर दिया.
इसी मामले में छठे अभियुक्त और मूसल के पूर्व गवर्नर ताहेर तौफ़ीक़ अल अनी के ख़िलाफ़ ठोस सबूत नहीं मिले और वकीलों का कहना है कि उन्हें रिहा कर देना चाहिए.
कुर्दों के नरसंहार के मामले में पूर्व राष्ट्रपति सद्दाम हुसैन भी एक अभियुक्त थे लेकिन दुजैल नरसंहार मामले में दिसंबर में उन्हें फाँसी दे दी गई थी और इसके बाद उनके ख़िलाफ़ आरोप ख़त्म कर दिए गए.
अनफ़ाल मामले में चार अभियुक्तों पर मानवता के ख़िलाफ़ अपराध का मामला दर्ज किया गया था जबकि केमिकल अली पर नरसंहार का अतिरिक्त मामला दर्ज था.
वर्ष 1987-88 के दौरान कुर्दों के ख़िलाफ़ बड़े पैमाने पर कार्रवाई की गई थी. मानवाधिकार संगठन ह्यूमन राइट्स वॉच का आकलन है कि इस कार्रवाई में एक लाख से ज़्यादा कुर्द मारे गए थे.