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शनिवार, 31 मार्च, 2007 को 05:42 GMT तक के समाचार

बंधकों की अदला-बदली से इनकार

अमरीकी विदेश विभाग ने इस प्रस्ताव को खारिज कर दिया है कि ईरान में बंधक बनाए गए 15 नौसैनिकों की रिहाई के बदले वह अपने यहाँ बंदी बनाकर रखे गए पाँच ईरानी नागरिकों को छोड़ दे.

इन ईरानी नागरिकों को जनवरी में इराक़ के इरबिल शहर में अमरीकी फ़ौजों ने बंदी बनाया था. अमरीका का आरोप है कि ये सभी चरमपंथियों को हथियार उपलब्ध करवा रहे थे.

उधर यूरोपीय संघ ने ईरान से सभी ब्रितानी नौसैनिकों को बिना शर्त और तुरंत रिहा करने की अपील की है.

उल्लेखनीय है कि ब्रितानी नौसैनिकों को ईरान के रिवोलुशनरी गार्ड्स ने पिछले शुक्रवार खाड़ी में पकड़ा था.

ईरान का आरोप है कि वे ईरानी जलक्षेत्र में प्रवेश कर गए थे. जबकि ब्रिटेन इस आरोप को ग़लत बताता है.

ईरान अपने आरोप के समर्थन में दो नौसैनिकों के साक्षात्कार सरकारी टेलीविज़न पर प्रसारित कर चुका है जिसमें वे कह रहे हैं कि वे ईरानी जलक्षेत्र में चले गए थे. हालांकि यह स्पष्ट नहीं हुआ है कि ये साक्षात्कार किन परिस्थितियों में लिए गए.

अमरीका का इनकार

अमरीकी अधिकारियों ने ईरान की निंदा की है और ब्रिटेन के प्रति समर्थन व्यक्त किया है.

हालांकि वे कह रहे हैं कि अमरीका इस विवाद से दूर रहना चाहता है.

अमरीकी विदेश विभाग के प्रवक्ता श्याँ मैककॉर्मक ने कहा है कि ब्रितानी नौसैनिकों के बदले पाँच ईरानी नागरिकों को रिहा करने का प्रस्ताव अमरीका को स्वीकार्य नहीं है.

इन पाँच लोगों को जनवरी में उत्तरी इराक़ी शहर इरबिल में पकड़ा था. अमरीकी फ़ौजों का कहना है कि ये सभी ईरान के रिवोल्युशनरी गार्ड के हैं और चरमपंथियों को हथियार उपलब्ध करवा रहे थे.

वैसे अमरीका ब्रितानी नौसैनिकों के मामले में एहतियात के साथ ही टिप्पणी कर रहा है.

यूरोपीय संघ की अपील

उधर यूरोपीय संघ ने ईरान से अपील की है कि वह 15 ब्रितानी नौसैनिकों को बिना शर्त तुरंत रिहा करे.

जर्मनी के ब्रेमेन शहर में यूरोपीय संघ के सभी 27 सदस्य देशों के विदेश मंत्रियों की एक बैठक में सर्वसम्मति से पारित प्रस्ताव में कहा गया है कि जो ईरान ने किया वह अंतरराष्ट्रीय नियमों का उल्लंघन है.

यूरोपीय संघ ने अपने प्रस्ताव में ब्रिटेन का खुला समर्थन करते हुए कहा है कि इस बात के पूरे सबूत हैं कि ब्रितानी सैनिक इराक़ी जलक्षेत्र में अपने नियमित गश्त पर थे.

इसके अलावा प्रस्ताव में कहा गया है कि ईरान को ब्रिटेन को तुरंत सूचित करना चाहिए कि बंधक बनाए गए नौसैनिक कहाँ रखे गए हैं और ब्रितानी अधिकारियों को उनसे मिलने की अनुमति दी जाए.

संघ ने ईरान के इस दावे को भी खारिज कर दिया है कि यह सिर्फ़ दो देशों के बीच का मामला है.