शनिवार, 31 मार्च, 2007 को 12:02 GMT तक के समाचार
ग्वांतानामो बे में बंद एक ऑस्ट्रेलियाई नागरिक डेविक हिक्स को सात साल क़ैद की सज़ा सुनाई गई है. अब हिक्स को ऑस्ट्रेलिया भेजा जाएगा जहाँ उन्हें सिर्फ़ नौ महीने की सज़ा काटनी होगी.
क्योंकि उनकी बाक़ी की सज़ा निलंबित रखी गई है. 31 वर्षीय हिक्स ने आतंकवाद का समर्थन करने की बात स्वीकार की थी.
ग्वांतानामो में ही एक सैनिक अदालत में उनके ख़िलाफ़ मामला चल रहा था और उनके अपने दोष स्वीकार करने के बाद जज ने उन्हें सात साल क़ैद की सज़ा सुनाई.
हिक्स को अफ़ग़ानिस्तान में पकड़ा गया था और वे पिछले पाँच साल से ग्वांतानामो में क़ैद हैं. ऑस्ट्रेलियाई सरकार ने हिक्स को स्वदेश भेजने की ख़बर पर ठंडी प्रतिक्रिया दी है.
अभियोग पक्ष के साथ हुए एक समझौते के बाद हिक्स को अधिकतम सात साल की सज़ा ही हो सकती थी. सैनिक अदालत के फ़ैसले के मुताबिक़ हिक्स को 60 दिन के अंदर यानी 29 मई तक ऑस्ट्रेलिया भेज देना होगा.
उम्मीद
लेकिन बचाव पक्ष के वकील माइकल मोरी ने उम्मीद जताई है कि अमरीका की ओर से यह मामला जल्द ही निपटा लिया जाएगा.
शुक्रवार को हिक्स जब अदालत में पहुँचे तो उनके लंबे बाल कट चुके थे और उन्होंने सूट पहन रखी थी. समझौते के तहत हिक्स ने अपना यह दावा वापस ले लिया है कि अफ़ग़ानिस्तान में पकड़े जाने के बाद अमरीकी सैनिकों ने उनकी पिटाई की थी और उनके ख़िलाफ़ आरोप लगाने से पहले उन्हें बेहोश कर दिया गया था.
अमरीका के मानवाधिकार संगठनों ने अमरीका पर आरोप लगाया है कि वह सैनिक दुर्व्यवहार के मामलों को दबाने की कोशिश कर रहा है. दूसरी ओर हिक्स के पिता ने अपना वह आरोप फिर दोहराया है कि उनके बेटे के साथ दुर्व्यवहार हुआ है.
टेरी हिक्स ने ऑस्ट्रेलियाई रेडियो को दिए इंटरव्यू में कहा कि वे इस मामले को आगे बढ़ाएँगे लेकिन उन्होंने इस पर ख़ुशी भी जताई कि कम से कम उनका बेटा स्वदेश तो लौट रहा है.
हालाँकि ऑस्ट्रेलियाई प्रधानमंत्री जॉन हॉवर्ड ने आरोप लगाया है कि कुछ लोग हिक्स को हीरो बनाने की कोशिश कर रहे हैं. उन्होंने कहा, "हिक्स ने यह स्वीकार किया है कि उन्हें सब कुछ जानते हुए अल क़ायदा की मदद की."
सिडनी से बीबीसी संवाददाता का कहना है कि ऑस्ट्रेलिया की सरकार अमरीका की समर्थक मानी जाती है लेकिन हिक्स के मामले में उन पर काफ़ी दबाव रहा है.