शुक्रवार, 30 मार्च, 2007 को 09:54 GMT तक के समाचार
ब्रिटेन अपने 15 नौसैनिकों को खाड़ी में हिरासत में लिए जाने के मुद्दे को यूरोपीय देशों के विदेश मंत्रियों की बैठक में उठाने जा रहा है जो शुक्रवार को जर्मनी में हो रही है.
उधर ईरान के सरकारी टेलीविज़न चैनल अल आलम ने ख़बर प्रसारित की है जिसमें कहा गया है कि वह पंद्रह ब्रितानी सैनिकों में से एक सैनिक का वो बयान प्रसारित करेगा जिसमें इस चैनल के अनुसार उस सैनिक ने स्वीकार किया है कि हिरासत में लिए जाने के समय ईरानी जलक्षेत्र में थे.
ग़ौरतलब है कि ईरान ने इन सैनिकों को अपनी हिरासत में रखा हुआ है और उसका कहना है कि ब्रितानी नौसैनिकों को जिस समय पकड़ा गया है, उस समय वे ईरानी जलक्षेत्र में थे जबकि ब्रिटेन का कहना है कि वे इराक़ी जलक्षेत्र में थे.
ब्रिटेन ने अब इस मुद्दे को शुक्रवार को यूरोपीय देशों के विदेशमंत्रियों की बैठक में उठाने का फ़ैसला किया है. इससे पहले संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद ने ब्रितानी सैनिकों को हिरासत में लिए जाने पर चिंता जताई थी और ब्रितानी सैनिकों को रिहा किए जाने का आहवान किया था हालाँकि परिषद के इस बयान को ठंडा ही बताया जा रहा है.
ब्रिटेन सुरक्षा परिषद की तरफ़ से सख़्त भाषा वाला बयान चाहता था और अमरीका ने भी इस पर ऐतराज़ जताया है कि सुरक्षा परिषद ने बहुत कमज़ोर रुख़ का
इस्तेमाल किया है.
ईरान सरकार ने संयुक्त राष्ट्र के इस बयान को यह कहते हुए ख़ारिज कर दिया है कि इस मामले में किसी तीसरे पक्ष के शामिल होने से कोई मदद नहीं मिलने वाली है.
इस बीच ब्रिटेन ने कहा है कि वह "इस मुद्दे पर ईरान की तरफ़ से मिले पहले लिखित संदेश" पर गंभीरता से विचार कर रहा है.
उधर ब्रिटेन के भावी प्रधानमंत्री समझे जाने वाले और मौजूदा वित्त मंत्री गोर्डन ब्राउन ने हिरासत में लिए गए ब्रितानी नौसैनिकों के दल में मौजूद एकमात्र महिला के साथ बर्ताव की निंदा की है. ब्राउन ने कहा कि महिला के साथ जिस तरह का बर्ताव किया गया है अमानवीय और स्वीकार्य है.
ग़ौरतलब है कि इस साल के आख़िर में जब टोनी ब्लेयर प्रधानमंत्री पद छोड़ेंगे तो गोर्डन ब्राउन के ही इस पद पर बैठने की संभावना है.
ईरान सरकार ने दो पत्र प्रकाशित किए हैं जिन्हें उस ब्रितानी महिला का लिखा हुआ बताया गया है और उसमें स्वीकार किया गया है कि ब्रितानी नौसैन्य दल हिरासत में लिए जाने के समय ईरानी जलक्षेत्र में था और यह सुझाव भी दिया गया है कि ब्रिटेन को इराक़ से अपने सैनिक हटा लेने चाहिए.