बुधवार, 28 मार्च, 2007 को 14:56 GMT तक के समाचार
अमरीका का निकट सहयोगी माने जाने वाले सऊदी अरब के शाह अब्दुल्ला बिन अब्दुल अज़ीज़ ने कहा है कि इराक़ पर विदेशी ताक़तों का अवैध और अनैतिक क़ब्ज़ा है और उन हालात में वहाँ भाई-भाई में ख़ून बह रहा है.
रियाद में अरब लीग के सम्मेलन को संबोधित करते हुए शाह अब्दुल्ला ने कहा कि इराक़ में जातीय हिंसा की वजह से गृह युद्ध का ख़तरा पैदा हो गया है.
हालाँकि उन्होंने इस बारे में कोई ज़िक्र नहीं किया कि क्या इराक़ से अमरीकी नेतृत्व वाले विदेशी गठबंधन की सेनाएँ वापिस होनी चाहिए या नहीं.
सऊदी अरब को 1990 के पहले खाड़ी युद्ध के समय से ही अमरीका का निकट सहयोगी माना जाता है.
ग़ौरतलब है कि अरब लीग के इस वार्षिक सम्मेलन को इसलिए महत्वूपर्ण कहा जा रहा है क्योंकि सदस्य देश दो दिन तक के इस सम्मेलन में मध्य पूर्व शांति योजना में फिर से जान फूंकने पर विचार करेंगे.
शाह अब्दुल्ला ने इस बारे में कहा भी है कि मध्य पूर्व क्षेत्र में शांति स्थापना के लिए इसराइल-फ़लस्तीनी संघर्ष के मुद्दे को हल किया जाना बेहद ज़रूरी है और उसके लिए अरब देशों की एकता की दरकार है.
फ़लस्तीनी लोगों का ज़िक्र करते हुए शाह अब्दुल्ला ने कहा कि वे भी दमन और इसराइली क़ब्ज़े की वजह से मुश्किलें उठा रहे हैं. उन्हें आज़ादी और अपना राष्ट्र बनाने के अधिकार से वंचित रखा गया है.
उन्होंने कहा, "एक राष्ट्रीय एकता वाली फ़लस्तीनी सरकार बनने के बाद अब यह बेहद ज़रूरी है कि फ़लस्तीनी लोगों पर जारी बंधन को यथाशीघ्र समाप्त किया जाए ताकि शांति प्रक्रिया एक ऐसे माहौल में आगे बढ़ जहाँ दमन से मुक्त माहौल हो और जो अंततः एक स्वतंत्र फ़लस्तीन की स्थापना का रास्ता साफ़ हो सके."
इराक़ की स्थिति के बारे में शाह अब्दुल्ला ने कहा, "प्रिय इराक़ में अवैध विदेशी क़ब्ज़े के तहत भाई-भाई के बीच ख़ून बह रहा है और जातीय हिंसा की वजह से गृह युद्ध भड़कने का ख़तरा पैदा हो गया है."
ग़ौरतलब है कि क़रीब साठ साल पहले अरब लीग की स्थापना की गई थी और इस समय 22 अरब देश इसके सदस्य हैं.
अरब लीग के इस रियाद सम्मेलन में पाकिस्तान के राष्ट्रपति परवेज़ मुशर्रफ़ को विशेष अतिथि के रूप में आमंत्रित किया गया.