बुधवार, 28 मार्च, 2007 को 09:45 GMT तक के समाचार
इराक़ से ख़बरें मिल रही हैं कि पश्चिमोत्तर शहर तल अफ़ार में भीषण गोलीबारी हुई है जिसमें कम से कम 45 सुन्नी अरब लोग मारे गए हैं.
ख़बरों के अनुसार यह गोलीबारी संभवतः हाल के समय में शिया बहुल इलाक़ों में हुए हमलों का बदला लेने के लिए की गई लगती है.
सुरक्षा अधिकारियों का कहना है कि कम से कम 45 लोग मारे गए हैं और अनेक घायल हुए हैं.
एजेंसियों का कहना है कि तल अफ़ार शहर में शिया, सुन्नी और तुर्की समुदाय के लोग रहते हैं और वहाँ हाल के दिनों में इन समुदायों के बीच काफ़ी तनाव बढ़ा है.
मंगलवार को गोलीबारी तल अफ़ार के अल वहदा में हुई जहाँ मुख्य रूप से सुन्नी लोग रहते हैं और कुछ ऐसी भी ख़बरें मिली हैं कि इन शिया हथियारबंद लोगों में कुछ पुलिसकर्मी भी थे.
समाचार एजेंसी ने तल अफ़ार शहर के मेयर ब्रिगेडियर नाजिम अल जुबूरी के हवाले से ख़बर दी है, "शिया सशस्त्र लड़ाकों ने सुन्नियों को उनके घरों में ही गोली चलाकर मार दिया. पचास से ज़्यादा लोग मारे गए."
समाचार एजेंसी एपी ने पुलिस और अस्पताल के अधिकारियों के हवाले से कहा है कि शिया पुलिसकर्मियों ने सुन्नियों पर यह हमला किया जिसमें 45 से ज़्यादा लोग मारे गए.
एपी के अनुसार ये शिया पुलिसकर्मी मंगलवार को तल अफ़ार शहर में हुए भीषण धमाकों से आहत थे और बदला लेने के लिए उन्होंने यह हमला किया.
एजेंसियों के अनुसार इन पुलिसकर्मियों ने बुधवार को तड़के से ही सुन्नी इलाक़ों में घूमना शुरू कर दिया था और सुन्नियों और उनके घरों पर गोलियाँ चलानी शुरू कर दीं.
अस्पताल के अधिकारियों ने कहा कि क़रीब दो घंटे तक यह गोलीबारी चली और और मारे गए लोगों में 15 से 60 साल की उम्र तक के लोग हैं.
स्थानीय अस्पताल में एक डॉक्टर ने समाचार एजंसी रॉयटर्स को बताया कि मारे गए लोग जहाँ-तहाँ ज़मीन पर पड़े हैं क्योंकि अस्पताल में उन्हें रखने के लिए समुचित जगह नहीं है.
डॉक्टर ने बताया कि सभी लोगों के सिर में गोली मारी गई.
गोलीबारी के बाद हिंसा भड़कने से रोकने के लिए इराक़ी सुरक्षा बल तैनात किए गए हैं और पूरे शहर में कर्फ़्यू लगा दिया गया है.
ग़ौरतलब है कि एक ही दिन पहले यानी मंगलवार को विभिन्न हिस्सों में हुए कई बम विस्फोटों में कम से कम 80 लोग मारे गए थे और सौ से अधिक घायल हुए हैं.
सबसे अधिक नुक़सान तल अफ़र में हुआ जहाँ दो ट्रकों में हुए विस्फोटों में पचास लोगों की मौत हुई.