रविवार, 25 मार्च, 2007 को 18:58 GMT तक के समाचार
ईरान के विदेश मंत्री ने कहा है कि बंधक बनाए गए ब्रिटिश नौसैनिकों के ख़िलाफ़ अवैध तरीक़े से ईरानी जलसीमा में घुसने का मामला चलाया जा सकता है.
ईरान के परमाणु कार्यक्रम के मुद्दे पर संयुक्त राष्ट्र ने उसके ख़िलाफ़ प्रतिबंध और कड़ा कर दिया है. इसी के बाद विदेश मंत्री मनुचेहर मोत्तकी ने न्यूयॉर्क में ये चेतावनी दी.
इस बीच ब्रिटेन के प्रधानमंत्री टोनी ब्लेयर ने ब्रिटिश नौसैनिकों को बंधक बनाए जाने की घटना की निंदा की है.
बर्लिन में यूरोपीय संघ के शिखर सम्मलेन में हिस्सा लेने गए ब्लेयर ने इस कार्रवाई को अन्यायपूर्ण और गलत बताया.
इन नौसैनिकों को शुक्रवार को ईरान और दक्षिणी इराक़ के बीच शहत-अल-अरब जलमार्ग में बंधक बना लिया गया था.
ईरान के कट्टरपंथी छात्रों ने इन नौसैनिकों के ख़िलाफ़ मुक़दमा चलाने की माँग की है.
प्रतिबंध
इसस पहले ईरान के विवादास्पद परमाणु कार्यक्रम के मसले पर संयुक्त राष्ट्र ने उसके ख़िलाफ़ लागू प्रतिबंध और कड़ा करने के पक्ष में मतदान किया.
हालाँकि ब्रितानी रक्षा विभाग के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि लंदन स्थित ईरानी कूटनीतिज्ञों ने उनसे कहा है कि नौसैनिकों को राजनैतिक कारणों से बंधक नहीं बनाया गया है.
इससे पहले ईरान के ख़िलाफ़ दिसंबर 2006 में प्रतिबंध लगाए गए थे और ताज़ा प्रस्ताव के साथ प्रतिबंध और कड़े किए गए हैं.
इन नए प्रतिबंधों के साथ ईरान को हथियारों का निर्यात नहीं किया जा सकेगा और इसके अलावा ईरान के परमाणु कार्यक्रम से जुड़े व्यक्तियों और कंपनियों के खाते सील किए जा सकेंगे.
ईरान के विदेश मंत्री मनोशेर मोत्तकी ने इस कार्रवाई को 'अवैध' और 'अनुचित' बताया है और कहा है, "हम कोई टकराव नहीं चाहते. मैं यह ज़रुर कहना चाहता हूँ कि दबाव और धमकी से ईरान की नीति नहीं बदलेगी."
उनका कहना था कि प्रतिबंध न तो कोई विकल्प था और न हल.
उन्होंने कहा, "शांतिपूर्ण परमाणु कार्यक्रम के लिए ईरान के ख़िलाफ़ प्रतिबंध लगाना संयुक्त राष्ट्र के नियमों का सरासर उल्लंघन है."
ईरान कहता रहा है कि उसका परमाणु कार्यक्रम शांतिपूर्ण कार्यों के लिए है और इसीलिए उसे रोकने से इनकार करता रहा है.
अमरीका सहित कई पश्चिमी देशों का आरोप है कि ईरान परमाणु बम बनाने के लिए कार्यक्रम चला रहा है.
अमरीका के विदेश उपमंत्री निकोलस बर्न्स ने कहा है कि ईरान पर हथियारों के निर्यात पर प्रतिबंध महत्वपूर्ण है क्योंकि वह हिज़्बुल्ला और हमास जैसे चरमपंथी गुटों को हथियारों का बड़ा आपूर्तिकर्ता है.