मंगलवार, 20 मार्च, 2007 को 22:01 GMT तक के समाचार
इराक़ के उपराष्ट्रपति तारिक़ अल हाशिमी ने विद्रोहियों से बातचीत की पेशकश की है. ये लोग लगातार इराक़ में हमले करते आए हैं.
बीबीसी के साथ बातचीत में इराक़ के उपराष्ट्रपति तारिक़ अल हाशिमी ने कहा कि उनका मानना है कि अल क़ायदा को छोड़कर हरेक के साथ बातचीत की जा सकती है.
उन्होंने स्पष्ट किया कि इसमें इराक़ी समुदाय के लोग होंगे और उनसे उनके डर और शंकाओं को लेकर गोलमेज सम्मेलन किया जा सकता है.
तारिक़ अल हाशिमी खुद एक प्रमुख सुन्नी राजनेता हैं. उन्होंने इराक़ की मौजूदा सरकार के जातीय स्वरूप पर भी अपनी चिंता जाहिर की.
उनका कहना था कि सेनाओं में विद्रोहियों ने जो घुसपैठ कर ली है, उसके लिए क़दम उठाए जाने चाहिए.
पलायन पर चिंता
दूसरी ओर संयुक्त राष्ट्र की शरणार्थियों से संबंधित संस्था (यूएनएचसीआर) का कहना है इराक़ की लड़ाई के मानवीय पहलू को नज़रअंदाज़ किया जा रहा है.
यूएनएचसीआर के प्रवक्ता पीटर केसलर ने कहा, " इस लड़ाई की मानवीय क़ीमत को पूरी तरह नज़रअंदाज़ किया जा रहा है, लगभग 20 लाख लोग इस लड़ाई की वजह से बेघर हो गए हैं."
इस समय सीरिया में 12 लाख और जॉर्डन में आठ लाख इराक़ी शरणार्थी हैं. सीरिया ने पिछले ही दिनों गुहार लगाई थी कि इस समस्या से निबटने में उसकी मदद की जाए.
शिया और सुन्नी संघर्ष बढ़ने की वजह से मिश्रित आबादी वाले इलाक़ों से दोनों समुदायों के लोगों का बड़े पैमाने पर पलायन हो रहा है.
बहुत बड़ी संख्या में लोग उत्तरी कुर्द इलाक़े में जा रहे हैं जहाँ क़ानून-व्यवस्था की स्थिति अपेक्षाकृत बेहतर है.
बीबीसी संवाददाता जिल मकगिवरिंग का कहना है कि इराक़ में हिंसा में मारे गए ज़्यादातर लोग पुरूष हैं इसलिए शरणार्थियों में बड़ी तादाद महिलाओं और बच्चों की है जिनका सहारा छिन गया है.
ऐसे में महिलाओं को रोज़ी-रोटी के लिए संघर्ष करना पड़ रहा है जो आसान नहीं है.