गुरुवार, 22 फ़रवरी, 2007 को 15:32 GMT तक के समाचार
ब्रिटेन के प्रधानमंत्री टोनी ब्लेयर ने इराक़ में बढ़ती असुरक्षा की स्थिति पर माफ़ी मांगने से यह कहते हुए इनकार कर दिया है कि इराक़ में रक्तपात के लिए ब्रिटेन और अमरीका को ज़िम्मेदार नहीं ठहराया जाना चाहिए.
बीबीसी के साथ एक ख़ास इंटरव्यू में टोनी ब्लेयर ने कहा कि इराक़ में हालात काफ़ी ख़राब हैं, ख़ासतौर से राजधानी बग़दाद में और उसके आसपास, लेकिन हिंसा के लिए विद्रोही और लड़ाका गुट ज़िम्मेदार हैं.
टोनी ब्लेयर ने इस बात को ख़ारिज कर दिया कि मार्च 2003 में अमरीका के नेतृत्व वाले विदेशी गठबंधन के इराक़ पर हमले की वजह से वहाँ असुरक्षा के हालात बने हैं. लेकिन ब्लेयर ने यह ज़रूर कहा कि पश्चिमी देशों की यह ज़िम्मेदारी बनती है कि वे इराक़ी लोगों का तब तक साथ दें जब तक कि वहाँ एक स्थिर लोकतंत्र नहीं स्थापित हो जाता है.
टोनी ब्लेयर ने इराक़ के हालात को "बहुत ख़राब" बताया लेकिन साथ ही यह भी कहा कि ब्रिटेन इराक़ में एक स्थिर लोकतंत्र की स्थापना के लिए संकल्पबद्ध है.
ब्रितानी प्रधानमंत्री ने कहा कि इराक़ के दक्षिणी इलाक़े बसरा से हालाँकि कुछ ब्रितानी सैनिक हटाए जा रहे हैं लेकिन इसका मतलब नहीं है कि ऐसा करके बसरा और उसके आसपास की स्थिति की कोई अच्छी तस्वीर बनाने की कोशिश भी नहीं की जा रही है.
टोनी ब्लेयर ने इन संभावनाओं को ख़ारिज करने से भी इनकार किया कि भविष्य में ज़रूरत पड़ी तो इराक़ में और ब्रितानी सैनिक फिर से भेजे जा सकते हैं.
उन्होंने कहा कि ब्रिटेन की महत्वकांक्षा इराक़ में एक कारगर अर्थव्यवस्था और स्थिर लोकतंत्र की स्थापना करना है.
ईरान के मामले पर टोनी ब्लेयर ने कहा कि वो नहीं समझते कि अगर ईरान परमाणु हथियार बनाने की क्षमता हासिल कर लेता है तो भी उसके ख़िलाफ़ सैनिक कार्रवाई करना सही होगा.
उन्होंने कहा कि कूटनीतिक चैनलों का इस्तेमाल करना ही एक उपयुक्त रास्ता हो सकता है.
सवाल
ग़ौरतलब है कि प्रधानमंत्री के रूप में टोनी ब्लेयर अब बस कुछ ही महीने सत्ता में रहेंगे और इस दौरान उनकी विदेश नीति पर सवाल उठाए जा रहे हैं.
एक पूर्व विदेश मंत्री डगलस हर्ड भी उन लोगों में शामिल हो गए हैं जो इराक़ युद्ध और उसके बाद की स्थिति के बारे में एक पूर्ण जाँच कराए जाने की माँग कर रहे हैं.
लेकिन बीबीसी के साथ इंटरव्यू में टोनी ब्लेयर ने यह जताने में किसी शक का संकेत नहीं दिया कि पिछले दस साल के दौरान प्रधानमंत्री के रूप में उन्होंने जिस दख़लअंदाज़ी वाली नीति का पालन किया है, वह उनकी नज़र में सही है.
टोनी ब्लेयर ने इराक़ के पूर्व राष्ट्रपति सद्दाम हुसैन को सत्ता से हटाने पर माफ़ी मांगने से इनकार कर दिया लेकिन उन्होंने यह ज़रूर स्वीकार किया कि इराक़ में बेहद ख़राब हालात पैदा हो गए हैं लेकिन इस स्थिति की ज़िम्मेदारी ब्रिटेन या अमरीका पर नहीं बल्कि विद्रोहियों और लड़ाका गुटों पर है.