बुधवार, 21 फ़रवरी, 2007 को 11:50 GMT तक के समाचार
सुरेंद्र फुयाल
बीबीसी संवाददाता
नेपाल में सैकड़ों माओवादी संयुक्त राष्ट्र की निगरानी में बने अपने शिविरों को छोड़कर काम की तलाश में निकल पड़े हैं.
इसे बहुदलिय सरकार और कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ़ नेपाल (माओवादी) के बीच हुए शांति समझौते का उल्लंघन माना जा रहा है.
माओवादियों का कहना है कि सरकार उनके रहने और खाने-पीने की ज़रूरतों का ध्यान नहीं रख पाई है.
नवंबर में हुए समझौते के मुताबिक माओवादियों को संयुक्त राष्ट्र की निगरानी में शिविरों में रहना था. संयुक्त राष्ट्र फ़िलहाल इन माओवादियों और उनके हथियारों के पंजीकरण का काम में लगा हुआ है.
'शिविरों में सुविधाओं की कमी'
बीबीसी संवाददाता सुरेंद्र फुयाल का कहना है कि 550 माओवादी शक्तिखोर में अपना शिविर छोड़ कर चले गए. उन्हें अपने स्थानीय माओवादी कमांडरों के निगरानी में सड़क निर्माण का काम करते देखा गया.
बिबिध नाम के एक कमांडर ने बीबीसी को बताया, "जिस हिसाब से बाहर काम मिलता है उस हिसाब से आने वालों दिनों में और लोग शिविर छोड़कर जाएँगे."
वहीं काठमांडू में माओवादी प्रवक्ता कृष्ण बहादुर महरा ने कहा है कि बजट में कमी के चलते करीब तीस हज़ार माओवादियों में से बीस हज़ार काम की तलाश में अपने शिविरों से बाहर जाने पर मजबूर हो सकते हैं.
नेपाल सरकार का कहना है कि सरकार ने माओवादियों के रहने और खाने-पाने के लिए ज़रूरी धन आवंटित किया है लेकिन माओवादी नेताओं की शिकायत है कि उन्हें सात अस्थाई शिविरों में कई दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है.
नेपाल में वित्त मंत्रालय के अधिकारियों ने कहा है कि शिविरों के रख-रखाव और माओवादियों के लिए 50 करोड़ नेपाली रुपए दिए जा चुके हैं.
लेकिन माओवादी कमांडरों ने इस राशि को अपर्याप्त बताते हुए कहा है कि मूल ज़रूरतें पूरी करने और वेतन देने के लिए ये काफ़ी नहीं है.
माओवादियों के मुताबिक उसने अपने क़दमों के बारे में संयुक्त राष्ट्र और सरकार को अवगत करा दिया है.