मंगलवार, 20 फ़रवरी, 2007 को 22:10 GMT तक के समाचार
अमरीका की एक अदालत ने कहा है कि ग्वांतानामो बे में क़ैद लोगों को अमरीका की नागरिक अदालतों में सुनवाई का अधिकार नहीं है.
वाशिंगटन की एक अपील अदालत के इस फ़ैसले में कहा गया है कि नागरिक अदालतें इस बात का फ़ैसला कर पाने में सक्षम नहीं हैं कि क़ैदियों की गिरफ़्तारियाँ वैधानिक रूप से हुई हैं या नहीं.
अदालत का यह भी मानना है कि सैनिक कार्रवाइयों के तौर पर हुई गिरफ़्तारियों की वैधानिकता को चुनौती देने का अधिकार नागरिक अदालतों को नहीं है.
पिछले वर्ष अमरीकी राष्ट्रपति जॉर्ज बुश ने एक आतंकवाद विरोधी क़ानून पारित करवाया था जिसके तहत चरमपंथी हमलों के संदर्भ में गिरफ्तार किए गए लोगों पर मामला चलाने के नए प्रावधान तय किए गए थे.
अदालत का यह फ़ैसला राष्ट्रपति बुश के 'आतंकवाद के ख़िलाफ़' अभियान का समर्थन करता है और इस दिशा में यह फैसला एक बड़ी सफलता के तौर पर देखा जा रहा है.
चौकानेवाला फैसला
हालांकि दूसरी ओर अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार संगठन, एमनेस्टी इंटरनेशनल का इस फ़ैसले को चौंकाने वाला बताते हुए कहा है कि इसे चुनौती दी जानी चाहिए.
माना जा रहा है कि अब इस फ़ैसले के सामने आने के बाद इसे सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी जा सकती है.
ग़ौरतलब है कि ग्वांतानामो बे में बंदी बनाकर रखे गए लोगों के संदर्भ में मानवाधिकार संगठन बार-बार सवाल उठाते रहे हैं.
इन जेलों में क़ैद लोगों को प्रताड़ित करने की भी ख़बरें सामने आती रही हैं जिसकी वजह से अमरीका को निंदा का भी सामना करना पड़ा है.