http://www.bbcchindi.com

सोमवार, 12 फ़रवरी, 2007 को 14:01 GMT तक के समाचार

इराक़ के पूर्व उप राष्ट्रपति को फाँसी होगी

इराक़ की एक अदालत ने पूर्व उप-राष्ट्रपति ताहा यासीन रमादान की आजीवन कारावास की सज़ा को पलटते हुए उन्हें मौत की सज़ा सुनाई है.

अदालत ने कहा कि दुजैल नरसंहार मामले में रमादान की भूमिका को देखते हुए उन्हें फाँसी पर लटका देना चाहिए. वर्ष 1982 में दुजैल में 148 शिया मुसलमानों की हत्या कर दी गई थी.

इसी मामले में पूर्व राष्ट्रपति सद्दाम हुसैन और दो अन्य लोगों को फाँसी दी चुकी है.

संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार आयुक्त लुई ऑर्बर ने ताहा यासीन रमादान को मौत की सज़ा न देने की अपील की थी. नवंबर में ताहा यासीन रमादान को आजीवन कारावास की सज़ा सुनाई थी.

'मैं निर्दोष हूँ'

लेकिन एक अपीलीय अदालत ने इसकी सिफ़ारिश की कि रमादान को मौत की सज़ा मिलनी चाहिए. अपीलीय अदालत ने अपनी सिफ़ारिश के साथ ये मामला अदालत में वापस भेज दिया था.

अदालत में जब फ़ैसला सुनाया जा रहा था, उस समय भी रमादान लगातार अपने को निर्दोष बताते रहे. उन्होंने कहा, "ख़ुदा जानता है मैंने कुछ भी ग़लत नहीं किया."

जज अली अल कहाची ने अपने फ़ैसले में कहा, "जान-बूझकर हत्या जैसा अपराध करने के लिए ताहा यासीन रमादान को फाँसी दी जाएगी."

जज ने कहा कि इस फ़ैसले की समीक्षा एक अपील आयोग करेगा. फ़ैसला सुनाए जाने के बाद नाराज रमादान ने कहा, "मैं ख़ुदा की क़सम खाता हूँ कि मैं निर्दोष हूँ. अल्लाह मेरे साथ है. जिन लोगों ने मेरे साथ अन्याय किया हैं मैं उनसे बदला लूँगा."

इसी मामले में पूर्व राष्ट्रपति सद्दाम हुसैन को 30 दिसंबर को फाँसी पर लटका दिया गया था. जबकि उनके दो अन्य सहयोगी बरज़ान इब्राहिम अल तिकरिती और अवाद हामिद अल बंदर को जनवरी में फाँसी दी गई.

दुजैल नरसंहार मामले में तीन अन्य लोगों को 15 साल क़ैद की सज़ा सुनाई गई है.