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रविवार, 11 फ़रवरी, 2007 को 15:52 GMT तक के समाचार

'शिया विद्रोहियों के समर्थन में ईरान'

इराक़ में काम कर रहे अमरीकी सुरक्षा अधिकारियों का कहना है कि उनके पास इसके ठोस सबूत हैं कि ईरान इराक़ के शिया विद्रोहियों को हिंसा के लिए समर्थन दे रहा है.

शीर्ष अमरीकी रक्षा अधिकारियों ने बग़दाद में पत्रकारों को रॉकेट लाँचर, मोर्टार और अन्य उपकरणों को दिखाया और कहा कि ये हथियार वैसे ही हैं जैसे अमरीकी सैनिक गश्ती दलों पर आक्रमण में इस्तेमाल होते हैं.

इन अधिकारियों ने कैमरे पर आने से मना कर दिया और ना ही अपना नाम सार्वजनिक करने को कहा है. बीबीसी संवाददाता जॉन पील भी इस प्रेस कॉन्फ़्रेंस में मौजूद थे, जहाँ किसी भी रिकॉर्डिंग उपकरण को ले जाना मना था.

उन्होंने बताया कि ये हथियार ईरान से आए हैं और इसके लिए आदेश ईरानी सरकार के शीर्ष स्तर से दिए गए हैं.

अमरीकी अधिकारियों ने दावा किया कि उन्हें ये सूचना इराक़ में कई छापों के दौरान गिरफ़्तार ईरानियों से मिली है.

दस्तावेज़

अधिकारियों ने जब्त किए गए हथियारों और ईरानी नागरिकों की सूचना के आधार पर एक दस्तावेज़ भी तैयार किया है. बग़दाद स्थित बीबीसी संवाददाता का कहना है कि दस्तावेज़ तैयार करते समय इसका ख़्याल रखा गया है कि ख़ुफ़िया सूत्रों की सुरक्षा की जाए.

साथ ही सार्वजनिक किए जा रहे दस्तावेज़ों की विश्वसनीयता का भी ख़्याल रखा गया है.

अमरीकी सुरक्षा अधिकारियों ने बताया कि ईरान से आए हथियारों का इस्तेमाल अमरीकी सैनिकों पर हमले में भी हुआ है और ऐसे हमलों में जून 2004 से 170 से ज़्यादा अमरीकी सैनिक मारे गए हैं.

अमरीकी ख़ुफ़िया विशेषज्ञों का मानना है कि ये घातक बम ईरान में बनाए गए हैं और गुप्त रूप से इराक़ के शिया विद्रोहियों के पास भेजे गए.

अमरीका ने पहले भी दावा किया है कि ईरान से आए हथियारों का इराक़ में इस्तेमाल हो रहा है. लेकिन पहली बार ईरान के शीर्ष सरकारी अधिकारियों के लिप्त होने का दावा किया जा रहा है.

ईरान इन आरोपों का खंडन करता रहा है. अमरीकी अधिकारियों का कहना है कि ईरान बम बनाने की तकनीक के साथ-साथ इराक़ के शिया विद्रोहियों को पैसा और सैनिक प्रशिक्षण भी दे रहा है.

इस बीच इराक़ में हिंसा का दौर जारी है. रविवार को तिकरित के निकट एक पुलिस थाने पर हुए आत्मघाती हमले में कम से कम 15 लोग मारे गए.