शनिवार, 10 फ़रवरी, 2007 को 03:00 GMT तक के समाचार
संयुक्त राष्ट्र के नए महासचिव बान की मून ने अपनी नई टीम का गठन करते हुए महत्वपूर्ण पदों पर नियुक्तियों की घोषणा कर दी है.
अमरीका के राजनयिक बी. लिन पॉस्को को राजनीतिक मामलों के प्रमुख के सबसे अहम पद पर नियुक्त किया गया है.
संयुक्त राष्ट्र के उपमहासचिव और महासचिव पद की दौड़ में रह चुके शशि थरुर को इस टीम में जगह नहीं मिल पाई है और उन्होंने इस्तीफ़ा दे दिया है.
इससे पहले बान की मून की टीम में आंतरिक परिवर्तन की जो कोशिश की थी, उस पर विकासशील देशों ने आपत्ति की थी.
अहम पद पर अमरीका
राजनीतिक मामलों के प्रमुख का पद संयुक्त राष्ट्र में बहुत अहम होता है और आमतौर पर बड़े देशों की नज़र उस पर टिकी होती है.
यही वो व्यक्ति होता है जो महासचिव को सलाह देता है कि कहाँ संयुक्त राष्ट्र को दखल देना चाहिए और कहाँ नहीं.
इस सलाह में यह भी शामिल होता है कि कहाँ शांति सेना भेजे जाने की ज़रुरत है, किन देशों को चुनाव करवाने में सहयोग की ज़रुरत है और कहाँ कूटनीतिक हस्तक्षेप करना चाहिए.
इस महत्वपूर्ण पद पर बान की मून ने 63 वर्षीय बी. लिन पॉस्को को नियुक्त किया है. पॉस्को वरिष्ठ अमरीकी राजनयिक हैं और इससे पहले इंडोनेशिया में अमरीका के राजदूत के रुप में काम कर रहे थे.
वैसे मून तो उनको पहले ही नियुक्त करने वाले थे लेकिन अपनी टीम में आंतरिक फ़ेरबदल की उन्होंने जब कोशिश की तो कुछ विकासशील देशों ने इसका विरोध किया.
हालांकि पश्चिमी देशों के राजनयिकों को इसमें कोई आपत्ति नहीं थी.
पश्चिमी देशों के राजनयिक मानते हैं कि विकासशील देश इस पर स्वाभाविक रुप से आपत्ति करेंगे क्योंकि उनकी नज़र में संयुक्त राष्ट्र अमरीकी प्रभाव में काम करता है.
बान की मून के चीफ़ ऑफ़ स्टाफ़ विजय नांबियार ने नियुक्तियों की जो घोषणा की, उसके अनुसार चीन, जापान और मिस्र के राजनयिकों को अन्य महत्वपूर्ण पदों पर नियुक्त किया गया है.
उन्होंने बताया कि इस पुनर्गठन के बाद 17 वरिष्ठ पदों पर बैठे लोगों ने इस्तीफ़े दे दिए हैं.
थरुर बाहर
जिन 17 लोगों ने इस्तीफ़े दिए हैं उनमें शशि थरुर एक हैं.
अन्य लोगों के साथ थरुर का इस्तीफ़ा स्वीकार कर लिया गया है. वे उपमहासचिव के रुप में संचार और जनसूचना विभाग के प्रमुख थे.
उनकी जगह जापान के राजनयिक कियोताका आसाताका तो नियुक्त किया गया है.
संयुक्त राष्ट्र में लंबे समय से कार्यरत शशि थरुर ने पहली जून 2002 से इस पर काम करना शुरु किया था.
पिछले साल हुए चुनावों में वे संयुक्त राष्ट्र महासचिव पद के दावेदारों में से एक थे. बान की मून के बाद वे दूसरे नंबर पर रहे थे.
शशि थरुर लेखक भी हैं और उन्होंने कई महत्वपूर्ण किताबें लिखी हैं. महासचिव पद की दौड़ से बाहर होने के बाद उन्होंने कहा था कि उन्हें उनकी मेहनत का सही सिला नहीं मिला.