सोमवार, 05 फ़रवरी, 2007 को 02:49 GMT तक के समाचार
ब्रिटिश संगठनों के एक समूह ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि यदि ईरान पर सैन्य हमला किया गया तो इसके परिणाम बहुत गभीर होंगे.
इन संगठनों ने कहा है कि ईरान के विवादास्पद परमाणु कार्यक्रम पर टकराव के लिए अभी समय है और इस मसले को कूटनीतिक रास्तों से निपटाना चाहिए.
रिपोर्ट तैयार करने वाले इस समूह में ब्रिटिश विचार समूह, सहायता एजेंसियाँ, मज़दूर संगठन, ईसाई और मुस्लिम धार्मिक संस्थाएँ शामिल हैं.
उल्लेखनीय है कि अमरीका सहित कुछ यूरोपीय देशों का मानना है कि ईरान परमाणु हथियार बना रहा है जबकि ईरान का कहना है कि उसका परमाणु कार्यक्रम शांतिपूर्ण कार्यों के लिए ही है.
पिछले ही हफ़्ते अमरीकी विदेशमंत्री ने कहा था कि अमरीका ईरान पर हमले की तैयारी नहीं कर रहा है.
लेकिन उन्होंने किसी भी तरह की सैन्य कार्रवाई से इनकार नहीं किया और कई मोर्चों पर ईरान पर दबाव बढ़ाना शुरु कर दिया है.
चेतावनी और सुझाव
ईरान के ख़िलाफ़ किसी भी कार्रवाई के विरोध के स्वरों में एक स्वर ब्रिटिश संगठनों का भी जुड़ गया है.
इस रिपोर्ट को जारी करते हुए ईरान में ब्रिटेन के राजदूत रह चुके रिचर्ड डाल्टन ने कहा, "यदि सैन्य हमला हुआ तो इसके परिणाम गंभीर होंगे. हो सकता है कि ईरान की परमाणु हथियार हासिल करने की इच्छा प्रबल हो जाए, मध्यपूर्व में अस्थिरता बढ़ सकती है, तेल का संकट खड़ा हो सकता है और दुनिया के सामने नई आर्थिक चुनौती खड़ी हो सकती है."
उनका कहना था, "इस सूची के देखने के बाद सभी सरकारों का दायित्व बनता है कि वे इस मसले को कूटनीति से निपटाने का प्रयास करें, जिसमें संयुक्त राष्ट्र के प्रावधानों के तहत कार्रवाई शामिल है."
रिपोर्ट में सुझाव दिया गया है कि ब्रिटेन सरकार को अमरीका और ईरान से सीधी बात करनी चाहिए.
इसमें कहा गया है कि बातचीत शुरु करने के लिए या तो अमरीका अपनी यह शर्त हटा ले कि पहले ईरान अपना परमाणु कार्यक्रम बंद करे या फिर ईरान और अमरीका दोनों को राज़ी किया जाए कि वे अपनी शर्तों को छोड़कर बातचीत करें.
रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि यदि ईरान अपने परमाणु कार्यक्रम को छोड़ता है तो बदले में उसे कुछ देने के लिए पैकेज बनाने की तैयारी करना चाहिए. इस पैकेज में सुरक्षा की गारंटी भी होनी चाहिए, जो ईरान की मुख्य चिंता है.
इस रिपोर्ट पर 17 संगठनों ने हस्ताक्षर किए हैं.