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'इराक़ में 'गृह युद्ध' की स्थिति मानी'

अमरीकी ख़ुफ़िया रिपोर्ट में कहा गया है कि इराक़ में जारी संघर्ष से 'गृह युद्ध' की बू तो आती है लेकिन यह इराक़ की मौजूदा स्थिति का पूर्ण आकलन नहीं है.

अमरीकी रक्षा एजेंसियों ने यह रिपोर्ट तैयार की है. इसमें 'गृह युद्ध' की स्थिति को विवादास्पद बताते हुए कहा गया है कि यह वहाँ की पेचीदगियों का पूर्ण तस्वीर पेश नहीं करती.

व्हाइट हाउस ने इस रिपोर्ट को 'सख़्त लेकिन सही' बताया है. दस्तावेज़ में कहा गया है कि इराक़ में जातीय संघर्ष, हिंसा की प्रकृति और व्यापक विस्थापन गृह युद्ध जैसी स्थिति को बयान करता है.

इसमें कहा गया है कि बढ़ती हिंसा सुन्नी और शिया समुदायों के बीच बढ़ती कटुता का परिणाम है. उपर से कमजोर सरकार और सुरक्षा व्यवस्था भी इसमें अहम भूमिका निभा रही है.

रिपोर्ट कहती है कि इराक़ में जारी संघर्ष से वर्ष 1948 में इसराइल के गठन के बाद से मध्य-पूर्व में अब तक की सबसे बड़ी शरणार्थी समस्या पैदा हुई है.

अमरीकी रक्षा मंत्री रॉबर्ट्स गेट्स का कहना है कि गृह युद्ध की बात करना इराक़ की स्थिति को हलके में समझने जैसा है.

उनका कहना है, "मेरा मानना है कि इराक़ में अभी चार तरह की लड़ाई हो रही है. एक शिया बनाम शिया, दूसरा जातीय संघर्ष, तीसरा चरमपंथी हिंसा और चौथा अलक़ायदा के साथ."

गंभीर परिणाम

रिपोर्ट में कहा गया है कि अग़र हिंसा में कमी नहीं आई तो इसके गंभीर नतीज़े निकल सकते हैं.

इसमें कहा गया है, "अगर अगले 12 से 18 महीनों में हिंसा कम करने के उपाय रंग नहीं लाते हैं तो हमारा आकलन है कि आगे चल कर स्थिति ख़राब होगी."

वाशिंगटन स्थित बीबीसी संवाददाता का कहना है कि इस रिपोर्ट का इस्तेमाल राष्ट्रपति बुश इराक़ में और सैनिक भेजने की योजना को सही ठहराने के लिए कर सकते हैं.

हिंसा की ताज़ा घटना में शुक्रवार को हिला शहर में हुए दो आत्मघाती हमलों में कम से कम 58 लोगों की मौत हो गई और 150 से अधिक लोग घायल हो गए.