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मंगलवार, 30 जनवरी, 2007 को 14:24 GMT तक के समाचार

हमास और फ़तह में फिर गोलीबारी

फ़लस्तीनी प्रशासन में सत्तारूढ़ संगठन हमास और प्रतिद्वंद्वी पार्टी फ़तह के बीच मंगलवार को ही हुआ संघर्षविराम टूट गया है और ताज़ा लड़ाई में हमास का एक सदस्य मारा गया है.

ताज़ा लड़ाई ग़ज़ा पट्टी के शहर ख़ान यूनिस में हुई. इस गोलीबारी से कुछ ही घंटे पहले दोनों संगठनों के बीच संघर्षविराम हुआ था.

ग़ज़ा में मौजूद बीबीसी के एक संवाददाता का कहना है कि उस समझौते से ऐसे हालात बने थे कि हमास और फ़तह के समर्थकों के बीच तनाव कुछ कम हो रहा था.

ग़ौरतलब है कि हमास फ़लस्तीनी प्रशासन की सत्ता चला रहा है और फ़तह संगठन के नेता फ़लस्तीनी राष्ट्रपति महमूद अब्बास हैं.

हमास और फ़तह के समर्थकों के बीच पिछले कुछ दिनों में ग़ज़ा में हुई आपसी लड़ाई में 30 से ज़्यादा लोगों की जान जा चुकी है.

उधर मंगलवार को ही इसराइली सेना ने कहा है कि उसके सैनिकों ने गज़ा पट्टी पर बमबारी की है.

हमास और फ़तह के समर्थकों के बीच संघर्षविराम लागू होने के बाद इसराइल ने कहा कि ग़ज़ा से इसराइल तक जाने वाली एक सुरंग पर उसने हमला किया है. किसी के हताहत होने का समाचार नहीं है.

एक सैनिक प्रवक्ता ने कहा कि इस सुरंग का इस्तेमाल इसराइल पर हमला करने के लिए होने वाला था.

दोनों पक्षों के बीच युद्धविराम के लिए हुई सहमति के बारे में फ़लस्तीनी विदेश मंत्री महमूद ज़हार का कहना था कि दोनों पक्ष अपने हथियारबंद लोगों को सड़कों से हटाने पर सहमत हो गए.

दोनों पक्षों के बीच मिस्र के राजनयिकों ने सुलह करवाई. पिछले साल हमास के सत्ता में आने के बाद से ही फ़तह और हमास के बीच संघर्ष चल रहा है.

कुछ दिनों पहले भी ऐसा ही एक समझौता हुआ था लेकिन फिर जल्दी ही दोनों पक्षों ने इसका उल्लंघन कर दिया.

इसराइल के हमले

इस बीच इसराइली सेना का कहना है कि उसके लड़ाकू विमानों ने गज़ा पट्टी पर बमबारी की है.

एक दिन पहले एलात में फ़लस्तीनी आत्मघाती हमलावर द्वारा किए गए विस्फोट में तीन इसराइली नागरिक मारे गए थे.

इस विस्फोट के बाद संयुक्त राष्ट्र महासचिव बान कि मून ने फ़लस्तीनी सुरक्षा बलों से अपील की थी कि वो इसराइली नागरिकों पर इस तरह के हमले रोकें.

बान ने हमले की निंदा करते हुए कहा था कि अधिकारियों को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि ऐसी घटनाएं दोबारा न हों.

पिछले अप्रैल के बाद आत्मघाती हमले की यह पहली घटना है. फ़लस्तीनी चरमपंथी संगठनों ने संयुक्त रूप से इसकी ज़िम्मेदारी ली थी.

सत्तारुढ़ हमास का कहना है कि इसराइल के अवैध कब्ज़े का विरोध करना उनका वैधानिक अधिकार है जबकि फ़लस्तीनी राष्ट्रपति महमूद अब्बास के एक सलाहकार का कहना है कि इस तरह के हमलों से फ़लस्तीनियों की छवि ख़राब हो रही है.