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मंगलवार, 30 जनवरी, 2007 को 13:13 GMT तक के समाचार

आशूरा के मौक़े पर धमाके, 45 की मौत

इराक़ में आशूरा के मौके पर विभिन्न जगहों पर हुए बम धमाकों में 45 से ज़्यादा शिया मुसलमान मारे गए हैं और करीब 90 से ज़्यादा लोग घायल हुए हैं.

मोहर्रम के दसवें दिन यानी यौमे आशूरा पर दुनिया भर में पैगंबर मोहम्मद के नवासे इमाम हुसैन की शहादत को याद किया गया.

करबला में इस अवसर पर 15 लाख से भी अधिक लोग इकट्ठे हुए.

पुलिस का कहना है कि बग़दाद के उत्तर-पूर्व कस्बे खानक़ीन में एक कूड़ेदान में पड़े बम के फटने से कम से कम 13 लोग मारे गए.

क्या है आशूरा?

ये लोग आशूरा को मौके पर एक धार्मिक स्थल पर इकट्ठा हो रहे थे.

इस धमाके के करीब एक घंटे बाद दिन की सबसे भीषण घटना हुई बालदुर्ज़ में विस्फोट हुआ जिसमें कम से कम 23 लोग मारे गए.

पुलिस का कहना है कि ये लोग एक शिया मस्जिद के बाहर जमा हुए थे और तभी एक आत्मघाती हमलावर ने आकर खुद को उड़ा दिया.

इसके अलावा बग़दाद में हुई हिंसा की घटनाओं में 10 से अधिक लोग मारे गए.

जातीय हिंसा

इराक़ पर 2003 में अमरीका के नेतृत्व में हुए हमले के बाद से आशूरा के मौके पर जातीय हिंसा होती रही है.

खानक़ीन और बालादुर्ज़ दोनों ईरान की सीमा से सटे हुए हैं. इस इलाक़े में शिया, सुन्नी और कुर्द सभी समुदाय के लोग रहते हैं.

पुलिस प्रवक्ता इदरिस मोहम्मद का कहना है कि खानक़ीन में हताहत होने वालों में ज़्यादा कुर्द-शिया समुदाय के लोग थे. खानक़ीन में 14 महीने वाले हुई हिंसा में 70 से ज़्यादा लोग मारे गए थे.

इराक़ में कुर्द समुदाय के ज़्यादातर लोग सुन्नी मुसलमान हैं लेकिन कुछ शिया भी है.

पिछले साल फ़रवरी में सुन्नी चरमपंथियों ने समारा शहर में शियाओं के एक बड़े धार्मिक स्थल पर बमबारी की थी जिसके बाद जातीय हिंसा भड़क गई थी. उस घटना के बाद से ये पहला आशूरा है.