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रविवार, 28 जनवरी, 2007 को 12:53 GMT तक के समाचार

'चीन प्रदूषण रोकने में विफल रहा'

चीन सरकार की नई रिपोर्ट के मुताबिक चीन पर्यावरण संरक्षण और इसमें सुधार की राह में आगे बढ़ने में नाकाम रहा है.

इस रिपोर्ट में चीन को पर्यावरण प्रदूषण फैलाने वालों में काफ़ी ऊपर रखा गया है और वर्ष 2004 के बाद इस स्थिति में कोई बदलाव नहीं आया है.

शैक्षिक और सरकारी विशेषज्ञों द्वारा तैयार इस रिपोर्ट में 118 देशों में से चीन को 100वें स्थान पर रखा गया है.

'पारिस्थितिकी मानकों' का स्तर तय करने के लिए क़रीब 30 सूचकों का इस्तेमाल किया गया. जिसमें कार्बन डाई ऑक्साइड का उत्सर्जन, गंदे पानी की निकासी और पीने के पानी की सफ़ाई भी शामिल है.

चिंता

शोधकर्ता दल के निदेशक ही चुआनक़ी ने कहा, "सामाजिक और आर्थिक आधुनिकीकरण के मुक़ाबले चीन पारिस्थितिकी सुधारों में बहुत पीछे हैं."

दुनिया की कुल आबादी का पाँचवाँ हिस्सा रखने के बावजूद चीन प्रतिदिन दुनिया के कुल तेल उत्पादन का तीन करोड़ बैरल आयात करता है. यानी सिर्फ़ चार फ़ीसदी खपत करता है.

लेकिन तेज आर्थिक वृद्धि से उसकी ऊर्जा ज़रूरतों में दिन प्रतिदिन इजाफ़ा हो रहा है.

चीन की मौजूदा योजना के अनुसार हर हफ़्ते एक नई ऊर्जा परियोजना शुरू की जानी है. इनमें से अधिकाँश योजनाएँ कोयला आधारित हैं.

विश्व बैंक का अनुमान है कि चीन में अगले 15 वर्षों में आर्थिक वृद्धि की दर हर साल छह फ़ीसदी के लगभग रहेगी, जो कि वैश्विक अर्थव्यवस्था की अनुमानित दर की दोगुनी है.

चीन अक्षय ऊर्जा पर भारी निवेश कर रहा है और उसकी योजना है कि कुल ऊर्जा खपत में 15 फ़ीसदी हिस्सा अक्षय ऊर्जा परियोजनाओं से हो.

बीजिंग से बीबीसी संवाददाता डेनियल ग्रीफ़िथ्स का कहना है कि यह रिपोर्ट
उन नेताओं के लिए चिंता का विषय है जो प्रदूषण कम करने का लगातार वादा करते रहे हैं.