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गुरुवार, 18 जनवरी, 2007 को 11:16 GMT तक के समाचार

मलिकी का नाराज़गी भरा बयान

इराक़ के प्रधानमंत्री नूरी अल मलिकी ने कहा है कि देश को और ज़्यादा सैनिक और हथियार मुहैया कराने से अमरीकी इनकार की वजह से अनेक लोगों को अपनी जान गँवानी पड़ी है और विद्रोही गतिविधियाँ भी लंबी चल रही हैं.

नूरी अल मलिकी ने विदेशी पत्रकारों के एक दल से बातचीत में कहा कि अगर अमरीका और ज़्यादा हथियार मुहैया कराए तो इससे इराक़ में तीन से छह महीनों के अंदर अमरीकी सैनिकों संख्या को काफ़ी कम किया जा सकता है.

मलिकी ने अमरीका से आग्रह किया कि वह इराक़ी सुरक्षा बलों को और ज़्यादा हथियार देने के समझौते पर अमल करे.

उधर बुश प्रशासन का कहना है कि अमरीका सरकार इराक़ी सुरक्षा बलों को खड़ा करने और मज़बूत बनाने के लिए काम कर रही है लेकिन संवाददाताओं का कहना है कि बुश प्रशासन इस बात को लेकर चिंतित भी है कि सैनिक साज़ो-सामान कहीं चरमपंथियों और विद्रोहियों के हाथों में ना पड़ जाए.

ग़ौरतलब है कि अमरीकी राष्ट्रपति जॉर्ज बुश ने नई इराक़ रणनीति के तहत कुछ ही दिन पहले इराक़ में बीस हज़ार अतिरिक्त सैनिक भेजने की घोषणा की थी जिनमें से ज़्यादातर राजधानी बग़दाद में भेजे जाएंगे क्योंकि वहीं ज़्यादा हिंसा हो रही है.

लेकिन नूरी अल मलिकी ने कहा है कि जिस चीज़ की सबसे ज़्यादा और सख़्त ज़रूरत है वो है और ज़्यादा सैन्य उपकरण.

नूरी अल मलिकी ने कहा, "अगर हम अपने सैन्य बलों को और ज़्यादा सैनिक साज़ो सामान और हथियार मुहैया कराने के समझौते पर अमल करने में कामयाब हो जाते हैं तो मेरा ख़याल है कि तीन से छह महीने के भीतर अमरीकी सैनिकों पर हमारी निर्भरता में नाटकीय रूप से कमी आएगी."

मलिकी ने यह भी कहा, "यह इस बात पर निर्भर करेगा कि हमारे सैन्य बलों को हथियारों और अन्य सैन्य साज़ो-सामान से लैस करने के लिए वास्तविक और ठोस प्रयास किए जाएँ."

वाशिंगटन में चर्चा

राजधानी बग़दाद में बीबीसी संवाददाता माइक वुलरिज का कहना है कि नूरी अल मलिकी के इस तरह के विचार ऐसे माहौल में सामने आए हैं जब इराक़ के सुरक्षा हालात पर अमरीका में काफ़ी विवादास्पद चर्चा चल रही है.

तीन अमरीकी सीनेटरों ने बुधवार को ही इस बात पर सहमति जताई थी कि बुश की इराक़ नीते की विरोध करने के लिए कांग्रेस में एक प्रस्ताव लाया जाए. इनमें से दो डेमोक्रेट और एक रिपब्लिकन सीनेटर हैं.

इस प्रस्ताव के पारित होने की संभावना तो है लेकिन इस पर अमल करना अनिवार्य नहीं होगा. उधर व्हाइट हाउस ने कहा है कि राष्ट्रपति बुश की योजना पर अमल किया जाएगा.

नूरी अल मलिकी ने अमरीका सरकार के इस बयान पर भी ऐतराज़ जताया है कि मलिकी की सरकार अस्थाई है क्योंकि इस तरह के बयानों से चरमपंथियों का मनोबल बढ़ता है.

मलिकी ने ब्रिटेन के एक अख़बार द टाइम्स को दिए एक इंटरव्यू में अमरीकी विदेश मंत्री कोंडोलीज़ा राइस के इस बयान की आलोचना की है जिसमें उन्होंने हाल ही में कहा था कि मलिकी की सरकार "बस कुछ ही दिन की मेहमान है".

नूरी अल मलिकी ने स्वीकार किया कि पूर्व राष्ट्रपति सद्दाम हुसैन को फाँसी दिए जाने के मामले में कुछ ग़लतियाँ हुई हैं लेकिन उन्होंन यह भी कहा कि यह कोई बदला लेने की कार्रवाई नहीं थी.

उधर राजधानी बग़दाद में ताज़ा हिंसा में अनेक बम धमाके हुए हैं जिनमें कम से कम 17 लोग मारे गए और 47 घायल हो गए.