गुरुवार, 18 जनवरी, 2007 को 16:36 GMT तक के समाचार
ईरान ने अमरीका को चुनौती दी है कि वह साबित करे कि जिन पाँच नागरिकों का अपहरण किया गया है वे इराक़ में चरमपंथियों की सहायता कर रहे थे.
ईरान ने अमरीका पर आरोप लगाया है कि उसने इन पाँच ईरानी राजनयिक कर्मचारियों का अपहरण किया है.
यह बयान उन ईरानी राजनयिक कर्मचारियों के बारे में आया है जिन्हें कुछ दिन पहले अमरीकी सैनिकों ने इराक़ के उत्तरी शहर इरबील में छापा मारकर गिरफ़्तार किया था.
अमरीका इस बात का खंडन करता है कि वे ईरानी कर्मचारी राजनयिक श्रेणी के हैं बल्कि अमरीका का कहना है कि गिरफ़्तार किए गए लोगों का संबंध ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड से है और वे इराक़ में शिया लड़ाकों को सशस्त्र करने में लगे हुए थे.
इराक़ में ईरान के राजदूत हसन काज़िमी क़ौमी ने इन गिरफ़्तारियों को "इराक़ की संप्रभुता पर हमला और इराक़ी लोगों की बेइज़्ज़ती क़रार" दिया और इन लोगों को तुरंत रिहा किए जाने की माँग की.
हसन काज़िमी क़ौमी ने इन आरोपों का खंडन किया कि ईरान इराक़ में हिंसा में शामिल रहा है. उन्होंने यह भी कहा कि जिन लोगों का "अपहरण" किया गया है वे राजनयिक कर्मचारी थे और अपने वैध कार्यों में लगे हुए थे.
हसन काज़िमी क़ौमी ने राजधानी बग़दाद में बीबीसी संवाददाता एंड्रयू नोर्द से कहा, "इस तरह की कार्रवाई उन तमाम अंतरराष्ट्रीय संधियों का उल्लंघन करती हैं जो कूटनीतिक संरक्षण प्रदान करती हैं. इतना ही नहीं, इस तरह की कार्रवाई इराक़ और ईरान के बीच हुए समझौते के दायरे के भी ख़िलाफ़ हैं."
हसन काज़िमी क़ौमी ने इन आरोपों का खंडन किया कि इराक़ के अस्थिर देखने में ईरान का दिलचस्पी है. उन्होंने कहा कि अगर इराक़ में अस्थिरता और अशांति होती है तो बहुत से शरणार्थी ईरान की सीमा पर आ सकते हैं.
हसन काज़िमी क़ौमी की गुरूवार की इस तीखी टिप्पणी से एक दिन पहले ही बुधवार को एक अन्य प्रभावशाली शिया नेता अब्दुल अज़ीज़ अल हकीम का बयान आया था जिसमें उन्होंने ईरानी कूटनीतिक कर्मचारियों को गिरफ़्तार किए जाने की घटना को इराक़ की संप्रभुता पर हमला क़रार दिया था.