बुधवार, 17 जनवरी, 2007 को 12:24 GMT तक के समाचार
भारत में पवित्र और शुभ समझे जाने वाले स्वास्तिक चिन्ह पर यूरोप भर में प्रतिबंध लगाने के प्रस्ताव का काफ़ी विरोध हो रहा है और अनेक हिंदू लोग भी विरोध में शामिल हो गए हैं.
यूरोपीय संघ के देशों में स्वास्तिक चिन्ह पर प्रतिबंध लगाए जाने की पेशकश जर्मनी की तरफ़ से आई है लेकिन इस पाबंदी विरोधी मुहिम में यूरोप के हिंदू भी शामिल हो गए हैं.
ब्रिटेन के हिंदू फोरम के रमेश कल्लीदाई ने बताया कि नाज़ियों इस चिन्ह को अपनाए जाने से हज़ारों साल पहले से ही स्वास्तिक शांति का एक प्रतीक चिन्ह रहा है.
रमेश कल्लीदाई कहते हैं, “स्वास्तिक पाँच हज़ार वर्षों से शांति के प्रतीक के रूप में अपनाया जाता रहा है. नाज़ियों ने जिस तरह इसका इस्तेमाल किया, यह ठीक उसके विपरीत है.”
उनका कहना है कि स्वास्तिक पर प्रतिबंध लगाना हिंदुओं के प्रति भेदभाव होगा.
यूरोपीय संघ का वर्तमान अध्यक्ष देश जर्मनी नाज़ी नरसंहारों से इनकार और नाज़ी प्रतीकों के इस्तेमाल को अपराध घोषित करना चाहता है.
कल्लीदाई ने कहा कि उनका संगठन इस मुद्दे को उठाने के लिए यूरोपीय क़ानून-निर्माताओं को पत्र लिख रहा है.
उनके मुताबिक हॉलैंड, बेल्जियम और इटली के हिंदू भी इस अभियान में शामिल हैं.
उन्होंने कहा कि इस प्रतीक के नाज़ी निहितार्थों की निंदा की जानी चाहिए लेकिन हिंदू धर्म में इसके इस्तेमाल का सम्मान किया जाना चाहिए.
रमेश कल्लीदाई कहते हैं, “केवल इसलिए कि नाज़ियों ने इस प्रतीक का दुरुपयोग किया और अपने आतंक राज और प्रजातिवाद के प्रचार के लिए इसका ग़लत इस्तेमाल किया, इसका यह मतलब नहीं कि इसका शांतिपूर्ण इस्तेमाल भी प्रतिबंधित कर दिया जाए.”
स्वास्तिक चिन्ह को जर्मनी में पहले ही प्रतिबंधित किया जा चुका है.
वर्ष 2005 में भी इसे पूरे यूरोप में प्रतिबंधित किए जाने का प्रयास किया गया था लेकिन वह कामयाब नहीं हुआ.
उस समय ब्रिटेन सहित कई देशों की सरकारों ने इसपर एतराज़ जताया था. साल 2007 में एक जनवरी को जर्मनी छह महीने के लिए यूरोपीय संघ का अध्यक्ष बना है.