बुधवार, 17 जनवरी, 2007 को 03:47 GMT तक के समाचार
अमरीकी राष्ट्रपति बुश ने कहा है कि इराक़ में अधिकारियों ने सद्दाम हुसैन और उनके दो सहयोगियों को जिस तरीके से फाँसी दी गई, उससे ऐसा प्रतीत होता है कि बदले की भावना से उनकी जान ली गई.
इस मसले पर राष्ट्रपति बुश की ये सबसे गंभीर टिप्पणी कही जा सकती है.
ग़ौरतलब है कि मोबाइल फ़ोन के ज़रिए उतारी गई एक फ़िल्म में यह दिखाया गया था कि सद्दाम हुसैन को फाँसी दिए जाने के ठीक पहले वहाँ मौजूद लोग उन पर फ़ब्तियाँ कस रहे थे.
जबकि सद्दाम के सौतेले भाई को फाँसी दिए जाते वक़्त उनका सिर धड़ से अलग हो गया था.
अमरीका के पीबीएस टेलीविज़न के जिम लेहरर से बातचीत में बुश ने कहा कि सद्दाम और उनके सहयोगियों को जिस तरह मौत की सज़ा दी गई, उससे ऐसा प्रतीत होता है कि बदले की भावना से उनकी जान ली गई.
राष्ट्रपति बुश का कहना था,'' मैं उनके ख़िलाफ़ चले मुक़दमे से ख़ुश था. लेकिन मुझे निराशा हुई, और लगा कि उन्होंने ख़ास कर सद्दाम को फाँसी देने में गड़बड़ कर दी.''
उनका कहना था,'' इससे मलिकी सरकार को लेकर लोगों का संदेह बढ़ा है, और इससे मेरे लिए भी अमरीकी जनता को यह समझाना मुश्किल हो गया है कि मलिकी सरकार देश को एकजुट कर प्रगति की राह पर चलना चाहती है.''
'स्थिति से असंतुष्ट'
इंटरव्यू में बुश ने माना कि इराक़ की स्थिति से वो असंतुष्ट है, और आम अमरीकी भी युद्ध को लेकर असहज होते जा रहे हैं.
हालाँकि जॉर्ज बुश ने ये भी कहा कि अमरीकी सांसदों की आपत्तियों के बाद भी इराक़ में सैनिकों की संख्या बढ़ाने की अपनी योजना पर वो अमल ज़रूर करेंगे.
संयुक्त राष्ट्र और यूरोपीय संघ के नेताओं ने भी सद्दाम हुसैन के सौतेले भाई बारज़ान अल-तिकरिति और पूर्व मुख्य न्यायाधीश अवाद अल-बंदर को फाँसी दिए जाने की निंदा की है.
संयुक्त राष्ट्र महासचिव बान की-मून ने कहा कि उन्हें फाँसी दिए जाने पर खेद है. दूसरी ओर यूरोपीय संघ के नेताओं ने कहा कि इससे इराक़ियों के मेलमिलाप की कोशिशों को धक्का लगेगा.
संयुक्त राष्ट्र के मानवाधिकार प्रमुख लुइस आर्बर ने कहा है कि इस फाँसी ने ऐसे ही अपराध के दोषी दूसरे लोगों को सज़ा देना मुश्किल बना दिया है.
यूरोपीय संघ का कहना है कि वह किसी भी परिस्थिति में मौत की सज़ा दिए जाने के ख़िलाफ़ है.