मंगलवार, 16 जनवरी, 2007 को 07:57 GMT तक के समाचार
संयुक्त राष्ट्र और यूरोपीय संघ के नेताओं ने सद्दाम हुसैन के सौतेले भाई बारज़ान अल-तिकरिति और पूर्व मुख्य न्यायाधीश अवाद अल-बंदर को फाँसी दिए जाने की निंदा की है.
संयुक्त राष्ट्र महासचिव बान की-मून ने कहा कि उन्हें फाँसी दिए जाने पर खेद है. दूसरी ओर यूरोपीय संघ के नेताओं ने कहा कि इससे इराक़ियों के मेलमिलाप की कोशिशों को धक्का लगेगा.
अमरीका और ब्रिटेन ने भी फाँसी दिए जाने के तरीके पर चिंता जताई है.
संयुक्त राष्ट्र के मानवाधिकार प्रमुख लुइस आर्बर ने कहा है कि इस फाँसी ने ऐसे ही अपराध के दोषी दूसरे लोगों को सज़ा देना मुश्किल बना दिया है.
जबकि यूरोपीय संघ ने कहा है कि वह किसी भी परिस्थिति में मौत की सज़ा दिए जाने के ख़िलाफ़ है.
मिस्र में अमरीकी विदेश मंत्री कोंडोलीज़ा राइस ने कहा है, " हालांकि फाँसी इराक़ी प्रक्रिया है लेकिन इस बात से हमें निराशा हुई है कि अभियुक्तों को फाँसी देते वक़्त मर्यादा का ध्यान नहीं रखा गया."
उधर ब्रितानी प्रधानमंत्री के प्रवक्ता ने भी कहा है, " यदि फाँसी मर्यादित ढंग से नहीं दी गई तो यह बिल्कुल ग़लत है."
कुछ अन्य प्रतिक्रियाओं में कहा गया है कि इराक़ी अधिकारियों को फाँसी रोककर देश में एकता क़ायम करने की ओर ध्यान देना चाहिए.
फाँसी पर विवाद
दरअसल सद्दाम हुसैन के भाई बारज़ान अल तिकरिती की फाँसी को लेकर विवाद उठ खड़ा हुआ है.
इराक़ सरकार के अधिकारियों ने इस फाँसी की अधिकृत फ़िल्म पत्रकारों को दिखाई है. इस फ़िल्म से पता चलता है कि बारज़ान अल तिकरिती का सिर धड़ से अगल हो गया था.
अधिकारियों का कहना है कि यह एक दुर्घटना थी और उनके साथ कोई दुर्व्यवहार नहीं किया गया.
लेकिन इराक़ के सुन्नी सांसदों ने इस बात की जाँच की माँग की है कि फाँसी के दौरान बारज़ान अल तिकरिती का धड़ सिर से अलग कैसे हो गया.
सुन्नी मुसलमानों का आरोप है कि फाँसी से पहले ही उनकी हत्या कर दी गई थी या फिर फाँसी देने के बाद उनका सिर काटा गया.
सद्दाम हुसैन के सौतेले भाई बारज़ान अल-तिकरिति और पूर्व मुख्य न्यायाधीश अवाद अल-बंदर के ख़िलाफ़ 1980 के दशक में 140 से अधिक शिया नागरिकों की हत्या का दोषी साबित होने के बाद यह सज़ा सुनाई गई थी.
दुजैल नरसंहार के मामले में इन दोनों को सद्दाम हुसैन के साथ ही मौत की सज़ा सुनाई गई थी. सद्दाम हुसैन को 30 दिसंबर को फाँसी दे दी गई थी.