रविवार, 14 जनवरी, 2007 को 10:50 GMT तक के समाचार
ईरान ने माँग की है कि इराक़ में मारे गए छापे के दौरान अमरीकी सेना ने जिन पाँच ईरानी नागरिकों को पकड़ा है उन्हें रिहा किया जाए.
ईरान का कहना है कि ये लोग कूटनीतिज्ञ है.
जबकि अमरीका का कहना है कि गुरुवार को इबरिल में पकड़े गए लोगों का संबंध ईरानी रेव्युलुशनरी गार्ड से है. अमरीका के मुताबिक ये लोग इराक़ में चरमपंथियों को प्रशिक्षण देते हैं और हथियार सप्लाई करते हैं.
लेकिन ईरान के विदेश मंत्रालय ने कहा है कि ये लोग वाणिज्य दूतावास में काम करते हैं.
ईरानी विदेश मंत्री ने कहा, "इन लोगों की गतिविधियाँ वैध हैं और क़ानून के दायरे में है. "
विदेश मंत्री ने कहा कि जिस इमारत पर अमरीका ने हमला किया वो 1992 में शुरु की गई थी और आधिकारिक रुप से उसका पंजीकरण ईरानी वाणिज्य दूतावास के तौर पर हुआ है.
जबकि इराक़ी अधिकारियों का कहना है कि ये इमारत तब तक के लिए कार्यालय के तौर पर काम कर रही थी जब तक कि उसका बतौर वाणिज्य दूतावास पंजीकरण नहीं होता.
'ग़लत दावा'
ईरान इस बात पर अड़ा हुआ है कि कार्यालय और उसके कर्मचारियों को कूटनीतिक सुरक्षा मिलनी चाहिए. ईरानी विदेश मंत्री ने कहा है कि अमरीका का दावा ग़लत है.
अमरीका अकसर ईरान पर आरोप लगाता रहा है कि वो इराक़ में शिया गुटों को राजनीतिक स्तर पर मदद देता है और हथियार भी देता है. लेकिन इस बारे में कभी कोई सूबूत नहीं दिया है.
ईरान ने इस पूरे घटनाक्रम के बारे में इराक़ और स्विट्ज़रलैंड के दूतों से शिकायत की है.
पिछले महीने बग़दाद में कई ईरानी लोगों को अमरीका ने गिरफ़्तार किया था जिनमें ईरानी रेव्युलुशनरी गार्ड के दो अधिकारी भी शामिल थे.
बाद में ईरान सरकार के दबाव के बाद उन्हें छोड़ दिया गया था.