शनिवार, 13 जनवरी, 2007 को 13:34 GMT तक के समाचार
हमास के नेतृत्व वाली फ़लस्तीनी सरकार के प्रधानमंत्री इस्माईल हानिया ने राष्ट्र के नाम संबोधन में लोगों से एकजुटता बनाए रखने की अपील दोहराई है.
इस्माईल हानिया की यह अपील ऐसे माहौल में आई है जब हमास और उसके प्रतिद्वंद्वी संगठन फ़तह के बीच हाल के समय में हिंसक तनाव रहा है जिसमें तीस से ज़्यादा लोगों की जान गई है.
उधर सरकारी कर्मचारियों ने जो एक बड़ी हड़ताल का आहवान किया था उसे वापिस ले लिया है. इस हड़ताल को फ़तह संगठन का समर्थन हासिल था.
प्रधानमंत्री इस्माईल हानिया के राष्ट्र के नाम संबोधन को टेलीविज़न पर देखने वाले बीबीसी संवाददाता एलन जोन्सटन का कहना है कि हमास और फ़तह के बीच हाल के कुछ सप्ताहों में वाक युद्ध भी चल रहा था.
लेकिन फ़तह के नेता और राष्ट्रपति महमूद अब्बास ने भी दो दिन पहले अपने एक भाषण में सुलह-सफ़ाई वाली भाषा का इस्तेमाल किया था और अब प्रधानमंत्री इस्माईल हानिया ने भी टेलीविज़न पर राष्ट्र के नाम संबोधन में यही नरम रुख़ अपनाया है.
इस्माईल हानिया ने राष्ट्रीय एकता और एकजुटता बनाए रखने की बार-बार अपील करते हुए राष्ट्रीय एकजुटता वाली एक नई सरकार के गठन के लिए प्रयास फिर से शुरू करने की बात बी कही. उस सरकार में हमास और फ़तह शामिल होंगे.
इस्माईल हानिया ने इसराइल और अमरीका जैसे देशों पर आरोप लगाया कि फ़लस्तीनी क्षेत्रों में गृहयुद्ध को भड़काने की कोशिश कर रहे हैं.
बीबीसी संवाददाता का कहना है कि बीते सप्ताह ग़ज़ा में सड़कों पर हिंसा में कमी आई है और हानिया के संबोधन ने इस भावना को मज़बूत किया है कि दोनों ही गुट यानी हमास और फ़तह लड़ने के बजाय बातचीत और सुलह-सफ़ाई के हिमायती हैं.
और इस भावना को इस ताज़ा घटनाक्रम से और बल मिला है कि फ़तह के समर्थन से होने वाली सरकारी कर्मचारियों की हड़ताल को वापिस ले लिया गया है. इस हड़ताल का काफ़ी राजनीतिक महत्व था.
बहुत से सरकारी कर्मचारियों को इस बात पर बेहद ग़ुस्सा था कि उन्हें कई महीनों से पूरा वेतन नहीं मिला है. सरकारी कर्मचारियों की इस हड़ताल को फ़तह ने समर्थन की घोषणा की थी.
हमास के नेतृत्व वाली सरकार अपने कर्मचारियों को पूरा वेतन देने में नाकाम रही है क्योंकि इसराइल और कुछ पश्चिमी देशों ने फ़लस्तीनी सरकार के ख़िलाफ़ आर्थिक प्रतिबंध लगा रखे हैं.
सरकारी कर्मचारियों ने कहा है कि उन्हें अब भरोसा दिलाया गया है कि उनकी वेतन अदायगी कर दी जाएगी क्योंकि अरब देशों ने कुछ धनराशि फ़लस्तीनी सरकार को मुहैया कराई है.