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सोमवार, 08 जनवरी, 2007 को 11:30 GMT तक के समाचार

सद्दाम हुसैन के ख़िलाफ़ आरोप ख़त्म

इराक़ की अदालत ने कुर्दों के नरसंहार के मामले में सद्दाम हुसैन पर लगे आरोपों को वापस ले लिया है. 30 दिसंबर को दुजैल नरसंहार के मामले में सद्दाम हुसैन को फाँसी दे दी गई थी.

कुर्दों के नरसंहार के मामले में 21 दिसंबर को फिर से सुनवाई शुरू हुई थी. लेकिन अब सद्दाम हुसैन के बिना ही मुक़दमा आगे बढ़ेगा.

इस मामले में छह अन्य अभियुक्तों के ख़िलाफ़ युद्ध अपराध का मामला चल रहा है. मामला 1980 के दशक का है, जब कुर्दों के ख़िलाफ़ अभियान चलाया गया था और क़रीब एक लाख कुर्द मारे गए थे.

सद्दाम हुसैन को कुर्दों के नरसंहार मामले में फ़ैसला आने से पहले ही फाँसी दिए जाने को लेकर कुर्दों में निराशा थी क्योंकि वे चाहते थे कि इस मामले में भी फ़ैसला आ जाए तब उन्हें सज़ा हो.

इस मामले में छह अन्य अभियुक्तों में सद्दाम हुसैन के चचेरे भाई अली हसन अल माजिद भी हैं, जिन्हें केमिकल अली के नाम से भी जाना जाता है.

बचाव

आरोप है कि उन्होंने कुर्दों के ख़िलाफ़ रसायनिक हथियारों का इस्तेमाल किया था और इसी कारण उन्हें केमिकल अली का भी नाम दिया गया था.

बचाव पक्ष का कहना है कि कुर्दों के ख़िलाफ़ कार्रवाई वैधानिक थी, क्योंकि ईरान-इराक़ युद्ध के समय उन्होंने बग़ावत की थी, जिसे कुचलना ज़रूरी था.

बीबीसी संवाददाताओं का कहना है कि सद्दाम हुसैन को फाँसी दिए जाने के बाद इस मुक़दमे पर भी अंतरराष्ट्रीय समुदाय की नज़र होगी क्योंकि सद्दाम मामले में इराक़ी न्याय व्यवस्था की काफ़ी
आलोचना हुई थी.

सद्दाम हुसैन को फाँसी पर लटकाए जाने के समय उन पर ताने कसे जा रहे थे, जिसकी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कड़ी निंदा की गई.

संयुक्त राष्ट्र के नए महासचिव बान की-मून ने तो अपील भी की है कि दुजैल नरसंहार मामले में दो अन्य अभियुक्तों की फाँसी पर रोक लगे लेकिन इराक़ी सरकार ने स्पष्ट किया है कि इसी सप्ताह इन दोनों को फाँसी हो जाएगी.