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रविवार, 07 जनवरी, 2007 को 01:57 GMT तक के समाचार

संयुक्त राष्ट्र ने फाँसी रोकने की अपील की

संयुक्त राष्ट्र के नए महासचिव बान की-मून ने इराक़ के पूर्व राष्ट्रपति सद्दाम हुसैन के दो सहयोगियों की फाँसी रोकने की अपील की है.

बान ने संयुक्त राष्ट्र में इराक़ के प्रतिनिधि को लिखे पत्र में कहा है कि इराक़ी ट्रिब्यूनल के फ़ैसले पर अमल को रोका जाना चाहिए.

सद्दाम हुसैन के जिन सहयोगियों को फाँसी दी जानी है, उनमें से एक उनके सौतेले भाई और ख़ुफ़िया विभाग के प्रमुख बारज़ान अल-तिकरिति और पूर्व मुख्य न्यायाधीश अवाद अल-बंदर हैं.

इन दोनों को भी जल्दी ही फाँसी पर चढ़ाया जाना है.

सद्दाम हुसैन और उनके दोनों सहयोगियों के ख़िलाफ़ 1980 के दशक में 'शिया नागरिकों की हत्या का दोष' साबित होने के बाद यह सज़ा सुनाई गई है.

बीबीसी संवाददाता का कहना है कि इससे पहले बान की मून ने सद्दाम हुसैन की फाँसी पर जिस तरह की प्रतिक्रिया दी थी, उसकी निंदा की गई थी.

बान की-मून ने कार्यभार संभालने के बाद पहली बार पत्रकारों से हुई बातचीत में कहा था कि मौत की सज़ा हर देश का अपना मामला है और सद्दाम हुसैन ने जिस तरह के घृणित अपराध किए थे, उसके चलते ही उन्हें फाँसी दी गई है.

बान की-मून का यह बयान संयुक्त राष्ट्र की उस नीति से मेल नहीं खाता जिसमें मौत की सज़ा का विरोध करता है.

हालांकि महासचिव के प्रवक्ता ने सफ़ाई दी थी कि संयुक्त राष्ट्र की नीति में कोई परिवर्तन नहीं हुआ है.

उल्लेखनीय है कि सद्दाम हुसैन को एक हफ़्ते पहले ही फाँसी चढ़ा दिया गया था और जिस तरह से उन्हें सज़ा दी गई उसकी व्यापक निंदा हुई है.

सद्दाम हुसैन को अपमानजनक माहौल में फाँसी दिए जाने के विवरण एक अनधिकृत विवरण के प्रकाशन से सामने आए थे.

ब्राउन ने खेद जताया

उधर ब्रिटेन के वित्त मंत्री गॉर्डन ब्राउन ने कहा है कि सद्दाम हुसैन को जिस तरह से फाँसी दी गई वह अफ़सोसजनक और अस्वीकार्य है.

उन्होंने कहा कि जिस तरह से सज़ा दी गई है उससे शिया और सुन्नियों को बीच तनाव कम नहीं होने जा रहा है.

उन्होंने संतोष जताया कि पूरे मामले की जाँच हो रही है और इससे आगे के लिए सबक सीखा जा सकेगा.

इससे पहले ब्रितानी सरकार के कई मंत्री फाँसी दिए जाने के तरीक़ों पर चिंता जता चुके हैं.