मंगलवार, 02 जनवरी, 2007 को 21:09 GMT तक के समाचार
नए महासचिव बान की मून संयुक्त राष्ट्र की मौत की सज़ा का विरोध करने की पुरानी और घोषित नीति के ख़िलाफ़ जाते दिखाई पड़ रहे हैं.
उनके कार्यकाल के पहले दिन जब उनसे सद्दाम हुसैन को मौत की सज़ा के बारे में सवाल पूछे गए तो उन्होंने कहा कि मौत की सज़ा के मामले में फ़ैसला किसी भी देश पर निर्भर करता है.
हालांकि उनके प्रवक्ता ने स्पष्ट करने की कोशिश की है कि संयुक्त राष्ट्र अभी भी मौत की सज़ा के ख़िलाफ़ है.
अपने कार्यकाल के पहले दिन सलामी लेकर कार्यालय पहुँचे बान की मून का सामना जब अमरीकी पत्रकारों से हुआ तो उनसे सद्दाम हुसैन की फाँसी पर सवाल पूछे गए.
और बान की मून का जबाव था, "सद्दाम हुसैन घृणित अपराधों के लिए दोषी थे और उन्होंने इराक़ी जनता पर बयान न किए जा सकने वाले अत्याचार किए. हमें उनके अपराधों के शिकार लोगों को नहीं भूलना चाहिए. मौत की सज़ा के मामले पर हर देश को अपना फ़ैसला लेना चाहिए."
वैसे संयुक्त राष्ट्र की अधिकृत नीति है कि वह मौत की सज़ा का विरोध करता है. चाहे वह युद्धापराध हो या फिर मानवता के ख़िलाफ़ अपराध.
बाद में बान की मून के प्रवक्ता माइकल मोंटास ने साफ़ करने की कोशिश की, "मौत की सज़ा के मामले में संयुक्त राष्ट्र की नीति अपरिवर्तित है. वह इसका विरोध करता है."
"उन्होंने हर देश के क़ानून का मामला उस देश के लिए खुला छोड़ दिया है."
इटली अभियान चलाएगा
उधर इटली ने घोषणा की है कि वह मृत्युदंड पर विश्वव्यापी रोक लगाने के लिए संयुक्त राष्ट्र में अभियान चलाएगा.
इटली के प्रधानमंत्री रोमानो प्रोदी ने कहा है कि ऐसा कोई अपराध नहीं हो सकता जो एक दूसरे की जान लेने को उचित ठहरा सके.
संयुक्त राष्ट्र में इटली के राजदूत पहले ही आमसभा से उस प्रस्ताव पर विचार करने का अनुरोध कर चुके हैं जिसे इटली ने पिछले महीने प्रस्तुत किया था.
इससे पहले इटली 1994 और 95 में मृत्युदंड पर रोक लगाने का प्रस्ताव कर चुका है.
इटली में वामपंथी और दक्षिण पंथी दोनों राजनीतिक दल सद्दाम हुसैन को फाँसी दिए जाने को ग़लत ठहरा रहे हैं.
पूर्व प्रधानमंत्री बर्लुस्कोनी ने सद्दाम हुसैन की फाँसी को राजनीतिक और ऐतिहासिक ग़लती करार दिया है.