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मंगलवार, 26 दिसंबर, 2006 को 17:10 GMT तक के समाचार

सद्दाम हुसैन को 30 दिन के भीतर फाँसी

इराक़ में अपील सुनने वाली अदालत ने आदेश सुनाया है कि देश के पूर्व राष्ट्रपति सद्दाम हुसैन मानवता के ख़िलाफ़ अपराध करने के दोषी हैं और उन्हें मौत की सज़ा दी जाएगी.

पूर्व राष्ट्रपति सद्दाम हुसैन को एक इराक़ी अदालत ने पाँच नवंबर को मौत की सज़ा सुनाई थी जिसके ख़िलाफ़ उनकी ये अपील ख़ारिज कर दी गई है.

इसके बाद इराक़ी क़ानून के तहत आगे अपील करने का प्रावधान नहीं है और तीस दिन के भीतर इस आदेश का पालन करना अनिवार्य है.

अपील जज आरिफ़ शाहीन ने एक संवाददाता सम्मेलन में कहा, "तीस दिन की समयसीमा आगे नहीं बढ़ाई जा सकती. कल (यानि बुधवार) से किसी भी समय इस आदेश का पालन हो सकता है."

सद्दाम हुसैन की सज़ा पर बीबीसी हिंदी विशेष

महत्वपूर्ण है कि अपील कोर्ट के फ़ैसले की राष्ट्रपति जलाल तालाबानी ने पुष्टि करनी है लेकिन अपील कोर्ट के जज का कहना था कि सद्दाम हुसैन की सज़ा घटाई नहीं जा सकती.

भारत की प्रतिक्रिया

भारत सरकार के विदेश मंत्रालय ने इस मामले पर अपनी प्रतिक्रिया में कहा है कि उसे उम्मीद है कि पूर्व राष्ट्रपति सद्दाम हुसैन को फाँसी की सज़ा नहीं दी जाएगी.

भारत सरकार ने ये भी उम्मीद जताई है कि उनकी ज़िंदगी बख़्श दी जाएगी.

तस्वीरों में: सद्दाम के तीख़े तेवर

भारत सरकार ने अपने बयान में ये भी कहा है कि उसे उम्मीद है कि ऐसे कोई कदम नहीं उठाए जाएँगे जिनसे इराक़ में आपसी मैत्री की प्रक्रिया में बाधा आए और वहाँ शांति कायम करने में और देर हो.

शियाओं की हत्या का मामला

सद्दान के दो सहयोगियों की अपील भी ख़ारिज कर दी गई है. ये हैं बर्ज़ान अल-तिकरिती और अवाद अल-बांदार.

इन तीनों को 1982 में दुजैल नरसंहार के मामले में फाँसी की सज़ा सुनाई थी. उस नरसंहार में 148 शिया मारे गए थे.

शियाओं को निशाना तब बनाया गया था जब सद्दाम हुसैन पर 1982 में जनालेवा हमले की कोशिश हुई थी.

सद्दाम हुसैन के वकील ख़ालील अल-दुलैमी का कहना था कि सद्दाम को मौत की सज़ा देन से इराक़ में सांप्रदायिक हिंसा और बढ़ेगी.

उनका कहना था, "हमें आश्चर्य नहीं हुआ है. हमें पूरा यकीन हो गया है कि ये 100 प्रतिशत राजनीतिक मुकदमा था."

सद्दाम के दो साल बाद इराक़

बीबीसी संवाददाता का कहना है कि ये माना जा रहा है कि सद्दाम और उनके सहयोगियों को फाँसी अज्ञात समय और जगह पर दी जाएगी.

उनका कहना है कि हो सकता है कि फाँसी दिए जाने के बाद ही पता चले कि ऐसा हो गया है.

उनके अनुसार सद्दाम को फाँसी देने से उनके समर्थकों में रोष भरी प्रतिक्रिया हो सकती है.

सद्दाम के ख़िलाफ़ कुछ अन्य मामले भी चल रहे हैं.