रविवार, 24 दिसंबर, 2006 को 04:49 GMT तक के समाचार
ईरान ने अपने ऊपर लगाए गए प्रतिबंधों का जवाब देते हुए कहा है कि वह अब जल्दी ही नतांज़ परमाणु संयंत्र में यूरेनियम संवर्धन शुरू कर देगा.
ईरान के मुख्य परमाणु वार्ताकार अली लारीजानी ने एक ईरानी अख़बार को दिए इंटरव्यू में कहा कि परमाणु संयंत्र में तीन हज़ार सेंट्रीफ़्यूज लगाने का काम रविवार से शुरू हो जाएगा.
सेंट्रफ़्यूज का इस्तेमाल यूरेनियम संवर्धन के लिए होता है. पश्चिम देशों के दबाव के चलते अभी तक ईरान ने इन्हें परमाणु संयंत्रों में फिट नहीं किया था.
उधर अमरीका ने कहा है कि संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद ने ईरान के ख़िलाफ़ जो प्रतिबंध लगाए हैं, वो काफ़ी नहीं हैं. उसने और सख़्त क़दम उठाने का आह्वान किया है.
अमरीकी सहायक विदेश उपमंत्री निकोलस बर्न्स ने कहा कि सुरक्षा परिषद ने सिर्फ़ परमाणु पदार्थों की आपूर्ति पर रोक और विदेशों में स्थित कुछ ईरानी संपत्ति को ज़ब्त करने का प्रस्ताव पारित किया है जो काफी नहीं है.
उन्होंने कहा कि दुनिया के सभी देशों को ईरान के ख़िलाफ़ और कड़े अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंध लगाने चाहिए.
बर्न्स का कहना था कि उनका देश सभी देशों से और ख़ास कर रूस से ईरान पर और सख़्ती बरतने की अपील करेगा.
बर्न्स ने ईरान को बैंकों से मिलने कर्जों पर भी पाबंदी लगाने की माँग की. दूसरी ईरान ने स्पष्ट कर दिया है कि प्रतिबंधों के बावजूद और यूरोनियम संवर्धन का काम जारी रखेगा.
प्रतिबंध
संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद ने सर्वसम्मति से ईरान पर प्रतिबंध लगाने का एक प्रस्ताव पारित किया है. ये प्रस्ताव ईरान के परमाणु कार्यक्रम के संदर्भ में लगाया गया है.
इस प्रस्ताव के मुताबिक ईरान से माँग की गई है कि वह अपना यूरेनियम संवर्द्धन का कार्यक्रम बंद करे और परमाणु अप्रसार के बारे में अपनी ज़िम्मेदारियाँ निभाए.
इस प्रस्ताव के अनुसार ईरान के परमाणु कार्यक्रम से संबंधित सामान के आयात और निर्यात पर प्रतिबंध लगाया गया है.
इसके अलावा ईरान को परमाणु तकनीक देने पर प्रतिबंध लगाया गया है, उसकी कुछ पूँजी को 'ज़ब्त' किया गया है और कुछ लोगों के आने-जाने पर भी प्रतिबंध लगाया गया है.
ईरान पर प्रतिबंध लगाने के प्रस्ताव के पिछले मसौदे में ब्रिटेन, फ़्रांस और जर्मनी ने कुछ संशोधन किए ताकि रूस की कुछ आपत्तियों का समाधान हो सके.
कुछ विशेष ईरानी व्यक्तियों और संस्थाओं की विदेशों में संपत्ति को 'फ़्रीज़' करने यानी उनकी बिक्री या ख़रीद और उनमें से पैसा निकालने या डालने पर रोक को लेकर रूस को कुछ चिंताएँ थीं.
कुछ पश्चिमी देशों ने ईरान पर परमाणु हथियार बनाने की कोशिशों का आरोप लगाया है लेकिन ईरान का कहना है कि उसका परमाणु कार्यक्रम केवल शांतिपूर्ण उद्देश्यों के लिए है.